मनीष सिसोदिया पर केस
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शराब घोटाले में जेल में बंद दिल्ली के पूर्व उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया अब नई मुश्किल में फंसते दिख रहे हैं। सीबीआई ने दिल्ली सरकार की 'फीडबैक यूनिट' में कथित अनियमितताओं को लेकर सिसोदिया के खिलाफ नया मामला दर्ज किया है। पिछली महीने ही फीडबैक यूनिट को लेकर सीबीआई ने विजिलेंस विभाग को अपनी रिपोर्ट सौंपी थी। रिपोर्ट के आधार पर सीबीआई ने सिसोदिया पर केस चलाने की अनुमति मांगी थी।
फीडबैक यूनिट केस क्या है? यह मामला सामने कैसे आया? अभी इसमें क्या हुआ है? आइये जानते हैं…
मनीष सिसोदिया
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फीडबैक यूनिट केस क्या है?
2015 में सत्ता में आने के बाद दिल्ली सरकार ने एक फीडबैक यूनिट बनाई थी जिसका काम हर विभाग पर नजर रखना था। सरकार का कहना था इससे उनकी मंशा ये है कि विभागों के भ्रष्टाचार पर नजर रखी जा सके। हालांकि, बाद में सरकार पर आरोप लगा कि इसके जरिए दिल्ली सरकार विपक्षी दलों के कामकाज पर नजर रख रही थी।
दिल्ली सरकार के विजिलेंस विभाग के एक अधिकारी की शिकायत पर सीबीआई ने प्रारंभिक जांच की। 2016 में एजेंसी की ओर से कहा गया कि सौंपे गए कार्य के अलावा, फीडबैक यूनिट ने प्रमुख राजनीतिक व्यक्तियों की जासूसी की। सीबीआई के मुताबिक, आठ महीने के दौरान फीडबैक यूनिट ने 700 से अधिक मामलों की जांच की थी। इनमें से 60 प्रतिशत मामलों में राजनीतिक खुफिया जानकारी जुटाई गई।
दिल्ली के पूर्व एलजी नजीब जंग
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मामला सामने कैसे आया?
बताया जाता है कि फीडबैक यूनिट की स्थापना के लिए कोई प्रारंभिक मंजूरी नहीं ली गई थी, लेकिन अगस्त 2016 में सतर्कता विभाग ने अनुमोदन के लिए फाइल तत्कालीन एलजी नजीब जंग के पास भेजी गई। जंग ने दो बार फाइल खारिज कर दी। इसी बीच एलजी ने फीडबैक यूनिट में प्रथम दृष्टया अनियमितता पाई और मामले को सीबीआई को सौंप दिया।
सीबीआई ने अपनी रिपोर्ट में सरकारी खजाने में नुकसान का भी जिक्र किया था। एजेंसी की मानें तो फीडबैक यूनिट के गठन और काम करने के गैरकानूनी तरीके से सरकारी खजाने को लगभग 36 लाख रुपये का नुकसान हुआ। सीबीआई ने कहा था कि किसी अधिकारी या विभाग के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई।
फरवरी में फीडबैक यूनिट को लेकर सीबीआई ने विजिलेंस विभाग को अपनी रिपोर्ट सौंपी। इसके अनुसार मनीष सिसोदिया पर विपक्षी दलों के नेताओं की जासूसी करने का आरोप लगा। इस मामले में सीबीआई ने दिल्ली के पूर्व डिप्टी सीएम पर केस चलाने की अनुमति मांगी।
इसके बाद दिल्ली के उप-राज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने राष्ट्रपति को पत्र लिखकर गृहमंत्रालय के जरिए मनीष सिसोदिया पर केस चलाने की अनुमति मांगी। फीडबैक यूनिट सिसोदिया के ही अधीन काम कर रही थी। सीबीआई ने तत्कालीन सतर्कता निदेशक सुकेश कुमार जैन, फीडबैक यूनिट के संयुक्त निदेशक और सीएम के विशेष सलाहकार राकेश कुमार सिन्हा, फीडबैक यूनिट के दो वरिष्ठ अधिकारियों प्रदीप कुमार पुंज और सतीश खेत्रपाल और गोपाल मोहन के खिलाफ मामला दर्ज करने की भी मंजूरी मांगी थी। गोपाल मोहन भ्रष्टाचार विरोधी मामलों में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के सलाहकार के रूप में काम करते हैं।
CBI
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फीडबैक यूनिट केस में अभी क्या हुआ है?
मंजूरी मिलने के बाद बुधवार को सीबीआई ने मनीष सिसोदिया और अन्य पर केस दर्ज कर लिया। इसके साथ ही सीबीआई ने कार्रवाई तेज कर दी है। नई दिल्ली के सीबीआई-एसीबी थाने में दर्ज मामले में सीबीआई ने आरोपियों पर आपराधिक षड़यंत्र, संपत्ति के गबन, लोक सेवक द्वारा विश्वास का आपराधिक हनन, धोखाधड़ी के उद्देश्य से जालसाजी, कूटरचित दस्तावेज को असली के रूप में प्रयोग करना, खातों में फर्जीवाड़ा और लोक सेवक द्वारा आपराधिक कदाचार जैसे आरोप लगाए हैं।
Manish Sisodia
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सिसोदिया के अलावा और किन लोगों को इस मामले में आरोपी बनाया गया है?
एफआईआर में छह लोगों के नाम दर्ज हैं। इसके साथ ही अन्य अज्ञात के खिलाफ भी मामला दर्ज किया गया है। इस लिस्ट में जो नाम शामिल हैं, उनमें…
1. मनीष सिसोदिया, दिल्ली के पूर्व डिप्टी सीएम
2. सुकेश कुमार जैन, तत्कालीन सचिव सतर्कता विभाग
3. राकेश कुमार सिन्हा, मुख्यमंत्री के विशेष सलाहकार और संयुक्त निदेशक, फीडबैक यूनिट
4. प्रदीप कुमार पुंज उप निदेशक, फीडबैक यूनिट
5.फीड बैक ऑफिसर के पद पर कार्यरत सतीश खेत्रपाल
6. गोपाल मोहन, दिल्ली के मुख्यमंत्री के भ्रष्टाचार विरोधी सलाहकार
7. अज्ञात अन्य