पुंछ में सेना के वाहन पर आतंकी हमले में शहीद हुए जवानों के गांव रो रहे हैं। वे अपने क्षेत्र में नायकों की तरह थे और दूसरों को प्रेरित करते रहते थे। घरवालों में देश के लिए शहीद होने वाले अपने को खोने का दर्द के साथ फख्र भी है।
उनका कहना है कि सरकार को देखना है कि बलिदान व्यर्थ न जाए। मोगा चड़िक गांव के कुलवंत सिंह 14 साल पहले सेना में भर्ती हुए। उनके पिता बलदेव सिंह ने कारगिल युद्ध के दौरान पाकिस्तानी सेना से लड़ते हुए बलिदान दिया था। वे एक महीने पहले ही छुट्टी से लौटे थे। खासतौर पर तीन माह पहले पैदा हुए अपने बच्चे से मिलने आए थे। उनकी एक डेढ़ वर्ष की बेटी भी है। कारगिल में पिता और अब कुलवंत के जाने से परिवार पर दुखों का पहाड़ सा टृट पड़ा है। उनकी शहादत की खबर से पूरे गांव में मातम पसरा हुआ है।
इस बीच पुंछ आतंकी हमले में शहीद हुए सिपाही हरकिशन सिंह के पार्थिव शरीर को उनके पैतृक गांव गुरदासपुर लाया गया है। पुंछ आतंकी हमले में शहीद हुए सिपाही सेवक सिंह के परिवार ने उनके निधन पर शोक व्यक्त किया है। सेवक के दादा माखन सिंह ने कहा कि उनके नाम पर एक स्कूल का नाम रखा जाना चाहिए और उनकी मूर्ति स्थापित की जानी चाहिए।
गांव के युवाओं के लिए असल जिंदगी के नायक थे देबाशीष बिस्वाल
पुरी में साक्षीगोपाल के पास खंडायत साही गांव के देबाशीष बिस्वाल गांव के युवाओं के लिए असल जिंदगी के नायक थे। गांव में जैसे ही उनके बलिदान की खबर पहुंची, तो सैकड़ों लोग परिवार को हौसला देने पहुंच गए। देबाशीष की 2021 में शादी हुई थी, उनकी पत्नी संगीता का रो-रोकर बुरा हाल है। वे अपनी सात माह की बेटी को भी नहीं संभाल पा रही हैं। बिस्वाल के चचेरे भाई ललित नायक कहते हैं, हमें गर्व है कि हमारे भाई ने देश की रक्षा के लिए बलिदान दिया है। उन्होंने बताया कि वे चार माह पहले ही गांव से ड्यूटी पर लौटे थे। गांव के युवाओं के लिए वे प्ररेणास्रोत थे।
परिवार के इकलौते बेटे थे सेवक सिंह मां से किया वादा नहीं निभा पाए
बठिंडा के तलवंडी साबो में बाघा गांव के सेवक सिंह 2018 में सेना में भर्ती हुए। सेवक सिंह अपने माता-पिता के अकेले बेटे थे। उनकी दो बहनें हैं। उन्होंने आतंकी हमले से एक दिन पहले ही भाई से बात की थी। उस समय उन्हें बुखार था, लेकिन फर्ज के पक्के सेवक सिंह ड्यूटी कर रहे थे। दो माह पहले जब वे छुट्टी से ड्यूटी पर लौटे थे, तो मां ने शादी करने के लिए कहा था। सेवक सिंह ने मां से वादा किया था कि पहले बहन की शादी हो जाए, फिर शादी कर लेंगे।
मनदीप सिंह की पत्नी बोलीं-सरकार तय करे कि बलिदान व्यर्थ न जाए
लुधियाना के चणकोइयां गांव के सिपाही मनदीप सिंह 2005 में सेना में शामिल हुए। उनके बलिदान की खबर सुनते ही पूरे गांव में शोक की लहर पसर गई। पत्नी जगदीप कौर डबडबाई आंखों और भरे हुए गले से सिर्फ इतना कह पाईं कि सरकार तय करे कि उनके पति का बलिदान व्यर्थ नहीं जाए। मनदीप सिंह का बेटा करणदीप सिंह 7 साल का है और बेटी खुशदीप 10 साल की है। उनक छोटे भाई जगपाल सिंह ने कहा, भाई की शहादत पर गर्व है। मां बलविंदर कौर ने कहा, एक दिन पहले ही बेटे से बात हुई थी।
हरकृष्ण सिंह के पिता बोले-बेटे पर गर्व, पर गर्भ में पल रहीं संतान को क्या कहेंगे
गुरदासपुर के तलवंडी भरथ गांव के रहने वाले सिपाही हरकृष्ण सिंह 2017 में सेना में भर्ती हुए। उनके पिता मंगल सिंह भी सेना में रह चुके हैं। वे कहते हैं कि पूरे परिवार को बेटे के बलिदान पर गर्व है। लेकिन, समझ नहीं पा रहे हैं कि हरकृष्ण की पत्नी की कोख में जो बच्चा पल रहा है, जब वह पूछेगा कि पिता कहां है, तो उसे क्या कहेंगे।
पत्नी दलजीत कौर बार-बार होश खो रहीं हैं, जबकि पूरा परिवार आंसू बहाते हुए उन्हें संभालने की कोशिश कर रहा है। मंगल सिंह ने बताया कि एक दिन पहले ही पूरे परिवार ने वीडियो कॉल पर बात की, दो वर्षीय बेटी खुशप्रीत बहुत देर तक पिता से बातें करती रही। हरकृष्ण सिंह फरवरी माह में ड्यूटी पर लौटे थे।