पश्चिम बंगाल में हुगली जिले के सिंगुर के किसानों को 10 साल तक उम्मीद और नाउम्मीदी के बीच झूलने के बाद बृहस्पतिवार को आखिर अपनी जमीन वापस मिल ही गई। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने जमीन लौटाने की कवायद शुरू करते हुए आज पहले चरण में लगभग तीन सौ किसानों को उनकी 100 एकड़ जमीन सौंप दी। राज्य की पूर्व वाममोर्चा सरकार ने वर्ष 2006 में टाटा की लखटकिया नैनो परियोजना के लिए इस जमीन का अधिग्रहण किया था।
दो महीने पहले सुप्रीम कोर्ट ने जमीन के अधिग्रहण के अवैध ठहराते हुए उसे खारिज कर दिया था और किसानों को उनकी जमीन लौटाने का निर्देश दिया था। तब ममता ने कहा था कि सरकार खेती लायक बनाने के बाद ही जमीन लौटाएगी। आज जो जमीन लौटाई गई है वह पूरी तरह खेती लायक है। मुख्यमंत्री ने खुद कई खेतों में सरसों के बीच डाल कर नए सिरे से उनमें खेती की शुरुआत की। इस मौके पर आयोजित समारोह में मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने आज से किसानों को उनकी जमीन लौटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। उन्होंने कहा कि 10 नवंबर तक सभी 997 एकड़ जमीन को उनके मालिकों को सौंप दिया जाएगा।
इलाके में खेती को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने किसानों को मुफ्त बीज और खाद देने का फैसला किया है। आज जिन लोगों को जमीन सौंपी गई उनको खाद व बीज भी सौंपे गए। ममता ने कहा कि इस जमीन पर सरसों के बाद आलू की खेती हो सकती है। हुगली जिले पूरे बंगाल में अपने आलू के लिए मशहूर है। मुख्यमंत्री ने कहा कि कल से रोजाना पचास एकड़ के हिसाब से खेत उनके मालिकों को सौंपे जाएंगे। इसके लिए सिंगुर में पांच मंच बनाए गए हैं।