कोरोना संक्रमण फैलने के बाद पहली बार संसद के सामने किसानों का हल्लाबोल होगा। केंद्र सरकार के तीन अध्यादेशों के विरोध में अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति (एआईकेएससीसी) ने 14 सितंबर को देशभर के किसानों को दिल्ली बुलाया है। इसके अलावा जिला एवं तहसील स्तर पर भी किसान-विरोध प्रदर्शन करेंगे। एआईकेएससीसी के संयोजक सरदार वीएम सिंह का कहना है कि केंद्र सरकार अन्नदाता के साथ धोखाधड़ी कर रही है। आत्मनिर्भरता का नारा देकर विदेशी कंपनियों और भारतीय कॉरपोरेट जगत को किसानों के साथ लूट मचाने का निमंत्रण दे रही है।
वीएम सिंह के मुताबिक सरकार ने किसानों को बर्बाद करने की ठान ली है। किसानों को ठीक से न्यूनतम समर्थन मूल्य नहीं दिया गया। अब केंद्र सरकार ने किसानों के अलावा उनकी पैदावार को भी दूसरों के हवाले करने का मन बना लिया है। मोदी सरकार कोरोना का बहाना बनाकर अपने किसान विरोधी और कॉरपोरेट पक्षधर फैसलों पर किसानों के विरोध को रोकने का प्रयास कर रही है। हरियाणा में किसानों पर लाठियां भांजी गई। किसानों के हित की बात करने की बजाए सरकार ने किसान विरोधी तीन अध्यादेश और नया बिजली बिल पेश करने की तैयारी की है।
सुरजेवाला के मुताबिक इसका जीता जागता उदाहरण भाजपा शासित बिहार है। साल 2006 में एपीएमसी एक्ट यानि अनाज मंडियों को खत्म कर दिया गया। आज बिहार के किसान की हालत बद से बदतर है। किसान की फसल को दलाल औने-पौने दामों पर खरीदकर दूसरे प्रांतों की मंडियों में मुनाफा कमा एमएसपी पर बेच देते हैं। अगर पूरे देश की कृषि उपज मंडी व्यवस्था ही खत्म हो गई, तो इससे सबसे बड़ा नुकसान किसान-खेत मजदूर को होगा और सबसे बड़ा फायदा मुट्ठीभर पूंजीपतियों को।
मोदी सरकार का दावा कि अब किसान अपनी फसल देश में कहीं भी बेच सकता है, पूरी तरह से सफेद झूठ है। आज भी किसान अपनी फसल किसी भी प्रांत में ले जाकर बेच सकता है, परंतु वास्तविक सत्य क्या है। कृषि सेंसस 2015-16 के मुताबिक देश का 86 फीसदी किसान पांच एकड़ से कम भूमि का मालिक है। जमीन की औसत मल्कियत दो एकड़ या उससे कम है। ऐसे में 86 फीसदी किसान अपनी उपज नजदीक अनाज मंडी-सब्जी मंडी के अलावा कहीं और ट्रांसपोर्ट कर न ले जा सकता या बेच सकता है। मंडी प्रणाली नष्ट होते ही सीधा प्रहार स्वाभाविक तौर से किसान पर होगा। मंडियां खत्म होते ही अनाज-सब्जी मंडी में काम करने वाले लाखों-करोड़ों मजदूरों, आढ़तियों, मुनीम, ढुलाईदारों, ट्रांसपोर्टरों व शेलर आदि की रोजी रोटी और आजीविका अपने आप खत्म हो जाएगी।