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किसान आंदोलन: कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन के बीच बोले तोमर- सरकार आज भी खुले मन से वार्ता के लिए तैयार

Thu, 22 Jul 2021 09:48 PM IST
संजीव कुमार झा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

सभी किसान आज केंद्र के तीन कृषि कानूनों का विरोध कर रहे थे। भारी सुरक्षा के बीच किसान अपनी संसद लगाकर केंद्र सरकार के खिलाफ हल्लाबोल कर रहे थे।
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कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर - फोटो : एएनआई
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विस्तार
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संसद के मानसून सत्र के दौरान दिल्ली के जंतर-मंतर पर करीब 200 किसानों ने गुरुवार को प्रदर्शन किया। ये सभी किसान आज केंद्र के तीन कृषि कानूनों का विरोध कर रहे थे। भारी सुरक्षा के बीच किसान अपनी संसद लगाकर केंद्र सरकार के खिलाफ हल्लाबोल कर रहे थे। वहीं अब इस मामले पर कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने भी बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि हम किसानों के साथ खुले मन से वार्ता करने के लिए तैयार हैं, हमने पहले भी कई दफा बातचीत की है।

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न्यूज एजेंसी एएनआई से बातचीत के दौरान केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि हमने किसानों से नए कृषि कानूनों के संदर्भ में बात की है।किसानों को कृषि कानूनों के जिस भी प्रावधान मे आपत्ति हैं वे हमें बताए, सरकार आज भी खुले मन से किसानों के साथ चर्चा करने के लिए तैयार है। वहीं किसानों के प्रदर्शन के साथ अब शिरोमणी अकाली दल भी आ गया है। आज सुबह संसद भवन के बाहर शिरोमणी अकाली दल के नेताओं ने कृषि मंत्री को कानूनों को विरोध में बनाए गए पोस्टर दिखाकर विरोध प्रदर्शन किया।

शिरोमणि अकाली दल की नेता हरसिमरत कौर ने इस मामले पर कहा कि यह सरकार किसान विरोधी है। किसान पिछले 8 महीनों से विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। सरकार कहती है कि किसान हमसे बात करें लेकिन क़ानून वापस नहीं होंगे। जब आप ने कृषि क़ानून वापस नहीं लेने है तो किसान आपसे क्या बात करेंगे।
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किसानों के प्रदर्शन को कांग्रेस का समर्थन: अधीर रंजन चौधरी
कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि हमारी पार्टी किसानों के प्रदर्शन और आंदोलन का पूर्ण रूप से समर्थन करती है और इस मुद्दे पर सदन में चर्चा हो, इसके लिए मैंने स्थगन प्रस्ताव को सदन के स्पीकर को दिया है। 

आम आदमी पार्टी का केंद्र सरकार पर हमला
आम आदमी पार्टी के लोकसभा सांसद भगवंत मान ने भी केंद्र पर हमला बोलते हुए कहा कि कृषि कानूनों के वापस लेने के सिवा और कोई विकल्प नहीं है। नरेंद्र सिंह तोमर बयान देते हैं कि हम किसानों से बातचीत करने के लिए तैयार हैं, बस वे 3 कानूनों को वापस लेने की बात न करें। तो फिर और क्या बात करें? 
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