किसान आंदोलन को आगे बढ़ा रहा संयुक्त किसान मोर्चा, गुरुवार को देशव्यापी 'रेल रोको आंदोलन' करेगा। इसे लेकर दोनों पक्षों में एक जैसा 'डर' है। केंद्र सरकार इसलिए चिंतित है कि कहीं लाल किला उपद्रव जैसा कुछ न हो जाए। दूसरी तरफ, किसान संगठनों के नेता भी इस बात को लेकर परेशान हैं कि कोई उपद्रवी किसानों की आड़ में गैर-कानूनी हरकत न कर दे।
किसान आंदोलन को बदनाम करने का प्रयास पहले भी हो चुका है। इसे लेकर किसान संगठन विशेष चौकसी बरत रहे हैं। चूंकि ट्रेनों में यात्री भी होंगे, इसलिए उनकी सुरक्षा को लेकर केंद्रीय एजेंसियां खास सतर्कता बरत रही हैं। इंटेलिजेंस महकमा, विभिन्न राज्यों की पुलिस के साथ समन्वय कर रहा है। किसान आंदोलन के समर्थन में 'टूलकिट' मामला अभी गर्माया हुआ है। खालिस्तानी समर्थक, शांत नहीं बैठ रहे हैं। सुरक्षा एजेंसियां, विदेश में बैठे आतंकवादी, गुरपतवंत सिंह पन्नू को लेकर ज्यादा सर्तक हैं।
एआईकेएससीसी के वरिष्ठ सदस्य अविक साहा कहते हैं, रेल रोको आंदोलन शांतिपूर्वक तरीके से किया जाएगा। चार घंटे तक सभी रूट की गाड़ियों का आवागमन प्रभावित होगा। सभी राज्यों की यूनिटों को खास हिदायत दी गई है कि वे रेल रोकने के दौरान किसी तरह की हुल्लड़बाजी न करें। किसान अपना झंडा व बैनर लेकर पटरी पर बैठ जाएंगे। इस दौरान अगर किसी यात्री को कोई परेशानी होती है तो किसान उसकी मदद करने की हर संभव कोशिश करेंगे।
बकौल अविक साहा, हम जानते हैं कि आंदोलन को बदनाम करने का प्रयास हो सकता है। उन लोगों ने पहले भी किसान आंदोलन को तोड़ने में कोई कसर बाकी नहीं छोड़ी थी। किसानों की आड़ में कुछ लोग ऐसा कर सकते हैं। इसके लिए किसान संगठन बहुत चौकसी बरत रहे हैं। ये भी तय किया जा रहा है कि ट्रेन की पटरियों पर किस जगह और कितने लोग बैठेंगे। वे संबंधित इलाके के किसान हों। पटरी पर बैठने वाले किसानों की पहचान रहे, इसके लिए आंदोलन की राज्य एवं जिला यूनिटों को जिम्मेदारी दी गई है।
केंद्र सरकार, रेल रोको आंदोलन को लेकर सर्तक है। गृह मंत्रालय के अधिकारियों ने इसे लेकर रेल मंत्रालय और सुरक्षा एजेंसियों के साथ मंत्रणा की है। सभी राज्यों की पुलिस एवं स्थानीय खुफिया यूनिटों को सतर्क किया गया है। पटरियों के आसपास लोकल पुलिस के साथ इंटेलिजेंस विभाग की टीमें भी रहेंगी। इसके अलावा केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती भी की जा रही है।
सुरक्षा एजेंसियों से जुड़े एक अधिकारी का कहना है कि किसानों के रेल रोको आंदोलन को लेकर सरकार पूरी तरह सतर्क हैं। सरकार का पूरा ध्यान यात्रियों की सुरक्षा और पटरियों पर रहेगा। जहां भी ट्रेनें ठहरेंगी, वहां स्थानीय पुलिस की टीम मौजूद रहेगी। हालांकि रेलवे द्वारा कई ट्रेनों के रूट डायवर्ट किए जा रहे हैं। राज्यों की खुफिया इकाइयों के कर्मी किसानों के बीच मौजूद रहेंगे। वे सुनिश्चित करेंगे कि लाल किला जैसा कोई उपद्रव न होने पाए। ट्रैक पर किसी वाहन मसलन ट्रैक्टर आदि को नहीं खड़ा होने दिया जाएगा।