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सरकार एक से डेढ़ साल तक भी कानून के क्रियान्वयन को स्थगित करने के लिए तैयारः तोमर

Wed, 20 Jan 2021 08:17 PM IST
संजीव कुमार झा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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नरेंद्र तोमर - फोटो : ANI
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सरकार और किसानों के बीच आज 10 वें दौर की वार्ता भी बेनतीजा रही। दोनों पक्षों के बीच वार्ता समाप्त होने के बाद कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि आज की बैठक साकारात्मक रही और संभावना है कि 22 तारीख को कोई हल निकल जाए।

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उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने कुछ समय के लिए कृषि सुधार क़ानूनों को स्थगित किया है। सरकार एक से डेढ़ साल तक भी क़ानून के क्रियान्वयन को स्थगित करने के लिए तैयार है। इस दौरान किसान यूनियन और सरकार बात करें और समाधान ढूंढे।

वहीं किसान संगठन  के नेताओं ने तोमर से कहा कि सरकार के प्रस्ताव पर कल हम अपने नेताओं के साथ विचार करेंगे और 22 जनवरी को दोपहर 12 बजे बैठक में आएंगे और आपको निर्णय से अवगत कराएंगे।
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किसान संगठन के नेताओं ने बताया कि केंद्र सरकार ने दोनों पक्षों की सहमति से एक निश्चित समय के लिए तीनों कृषि कानूनों को निलंबित करने और एक समिति के गठन के लिए उच्चतम न्यायालय में हलफनामा दायर करने का प्रस्ताव दिया है।  हालांकि उन्होंने कहा कि किसान संगठन कानूनों को वापस लेने की अपनी मांग पर अडिग हैं, लेकिन कानूनों को निलंबित करने के सरकार के प्रस्ताव पर गुरुवार को चर्चा करेंगे।

इससे पहले आज बैठक में सरकार ने एक बार फिर किसानों को तीनों कानूनों के फायदे बताए और कहा कि देश के बाकी राज्यों के किसान इन बिलों का समर्थन कर रहे हैं। यह उनके हित के लिए हैं। सरकार ने कहा कि आप लोग जो भी संशोधन चाहते हैं हम संशोधन करने के लिए तैयार हैं, लेकिन किसान तीनों बिलों की वापसी से कम पर मान नहीं रहे हैं। किसानों ने कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के पिछले बयानों का जिक्र करते हुए कहा कि आपने कई बार संसद में और बाहर भी ये कहा है कि कृषि स्टेट सब्जेक्ट है तो आप लोग इसमें क्यों हस्तक्षेप कर रहे हैं।

समिति की बैठकों में भाग नहीं लेंगे किसान
कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसान संघों ने बुधवार को उच्चतम न्यायालय से कहा कि वे अपनी शिकायतों पर ध्यान देने के लिए अदालत द्वारा नियुक्त समिति द्वारा बुलाई गयी बैठकों और विचार-विमर्शों में शामिल नहीं होंगे। उन्होंने कहा कि वे चाहते हैं कि नये कृषि कानूनों को वापस लिया जाए।

शीर्ष अदालत ने किसान संघों की ओर से पक्ष रख रहे वकीलों से कहा कि वह बस गतिरोध का समाधान और शांति चाहती है, वहीं समिति को निर्णायक अधिकार नहीं दिये गये हैं और वह अपनी रिपोर्ट अदालत को ही सौंपेगी।

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