किसानों की ट्रैक्टर परेड गणतंत्र दिवस पर लालकिला तक पहुंच गई। यह किसानों के उस रूट में शामिल नहीं था, जिसे दिल्ली पुलिस ने तय किया था। जब किसान लालकिले पर ट्रैक्टर चढ़ा रहे थे, उस वक्त किसान संगठनों का एक भी नेता मौके पर नहीं पहुंचा। किसानों और पुलिस के बीच झड़प हो रही थी, मगर नेताजी किसी दूसरे रूट पर ट्रैक्टर मार्च कर रहे थे। दिल्ली पुलिस ने ऐसे कई नेताओं को फोन भी किया, ताकि स्थिति को ज्यादा बिगड़ने से रोका जा सके। किसान ट्रैक्टर परेड के रूट को लेकर विभिन्न संगठनों के बीच असंतोष और असहमति रही है, पंजाब से जुड़े किसान संगठन के एक नेता ने यह बात स्वीकार की है।
किसान संगठनों के नेताओं का कहना था कि उनके बुलावे पर लाखों किसान अपने ट्रैक्टर लेकर दिल्ली के बाहर पहुंच गए हैं। अब कहा जा रहा है कि ट्रैक्टर मार्च पांच घंटे चलेगा, जिसमें पांच हजार किसान और इतने ही ट्रैक्टर शामिल हो सकेंगे। ट्रैक्टर मार्च का रूट भी उनके हिसाब से नहीं होगा। ज्यादातर किसान संगठन बाहरी रिंग रोड पर ट्रैक्टर मार्च निकालने के पक्ष में थे, लेकिन दिल्ली पुलिस ने उस मांग को अस्वीकार कर दिया।
बता दें कि 23 जनवरी की रात तक दो लाख से ज्यादा ट्रैक्टर दिल्ली के बाहर जमा हो चुके थे। करीब पचास हजार ट्रैक्टर ऐसे भी थे, जिनके बारे में कहा गया कि वे सौ किलोमीटर के दायरे में हैं। 24 जनवरी तक वे भी दिल्ली बॉर्डर पर पहुंच जाएंगे। उस समय तक संयुक्त किसान मोर्चा के नेताओं ने सभी दूसरे संगठनों से कहा था कि उन्हें बाहरी दिल्ली के करीब 51 किलोमीटर लंबे रूट पर ट्रैक्टर परेड आयोजित करने की इजाजत मिल जाएगी। चूंकि ये खुला रोड था तो अधिकांश संगठन इस पर सहमत थे।
इसी वजह से 23 और 24 जनवरी को भारी संख्या में ट्रैक्टर दिल्ली बॉर्डर तक पहुंच गए। बाद में 25 जनवरी को दिल्ली पुलिस ने बताया कि किसानों को केवल तीन रूटों पर ट्रैक्टर परेड करने की मंजूरी दी गई है। इस मसले पर किसान संगठनों की बैठक हुई थी। किसान मजदूर संघर्ष कमेटी के पदाधिकारी सुखविंदर सिंह का कहना था कि दिल्ली पुलिस ने ट्रैक्टर परेड को कमजोर करने के लिए जानबूझकर ऐसे रूट तय किए हैं। किसान संगठन के कई नेता इससे नाखुश थे। जब ढाई लाख ट्रैक्टर और करीब पांच लाख किसान दिल्ली सीमा पर पहुंच चुके हैं तो अब केवल पांच हजार ट्रैक्टरों को परेड में शामिल होने की बात कही जा रही है। यहीं से किसान संगठनों में असहमति और असंतोष का भाव नजर आया।
योगेंद्र यादव और दर्शनपाल जैसे किसान नेताओं ने दूसरे संगठनों पर यह दबाव बनाया कि वे पुलिस द्वारा बनाए गए रूट का पालन करें। पंजाब के दूसरे संगठनों की बात करें तो उन्हें दिल्ली पुलिस का यह रूट प्लान मंजूर नहीं था। उनका तर्क था कि सरकार ने उन्हें 62 दिन तक दिल्ली के बाहर तक बैठाए रखा है, ऐसे में अब केवल पांच हजार ट्रैक्टरों को दिल्ली में प्रवेश की इजाजत देना तर्कसंगत नहीं है। अगर इतने ही ट्रैक्टरों को मार्च की इजाजत देनी थी, तो लाखों किसानों और ट्रैक्टरों को दिल्ली क्यों बुलाया गया। इस लेकर जो बैठक हुई, उसमें किसान संगठनों के बीच असहमति दिखी। मंगलवार को जो कुछ हुआ, वह बहुत हद तक उसी असहमति और असंतोष का नतीजा था। पुलिस ने जो रूट तय किए थे, उन पर पांच हजार ट्रैक्टर चलने थे, लेकिन सभी संगठनों के नेता लाखों ट्रैक्टर लेकर उन रुटों पर उतर गए। किसी ने भी पांच हजार ट्रैक्टरों के नियम की परवाह नहीं की।
संयुक्त किसान मोर्चा के नेताओं का कहना है कि ट्रैक्टर परेड में शांति की अपील की गई है। कुछ लोग किसान के वेश में माहौल बिगाड़ना चाहते हैं। बाकी लाखों किसान शांतिपूर्वक तरीके से मार्च निकाल रहे हैं। राकेश टिकैत ने लालकिला पर हुई हरकत पर कहा, ये कुछ ऐसे लोगों की शरारत है जो किसी पार्टी विशेष से जुड़े हैं।
सरदार जगमोहन सिंह का कहना था कि लालकिले तक जाना या रूट तोड़ना, ऐसी कोई बात किसी संगठन की तरफ से नहीं कही गई। सभी से पुलिस के रुट पर चलने की अपील की गई थी। पंजाब के एक दूसरे नेता का कहना था कि लालकिले तक पहुंचकर किसानों ने अपना गुस्सा जाहिर किया है। पिछले दो माह से किसानों को सड़क पर बैठा रखा है, उन्होंने यही गुस्सा निकाला है। उनका मकसद, देश की धरोहर का अपमान करना नहीं था। आईटीओ और लालकिला पर जो कुछ हुआ, उस दौरान कोई भी प्रमुख नेता नहीं था, इस पर किसान नेताओं का कहना था कि सभी की ड्यूटी अलग-अलग मार्गों पर लगाई गई थी।