सुप्रीम कोर्ट ने एक कमेटी बनाकर किसान आंदोलन का हल खोजने की सलाह दी है। लेकिन इस कमेटी के माध्यम से भी समस्या का समाधान निकलने की संभावना बहुत कम दिखाई दे रही है। किसानों ने साफ कर दिया है कि वे इस कमेटी में बातचीत के लिए शामिल होंगे, लेकिन वे अपनी मांगों से पीछे हटने को तैयार नहीं हैं।
उनका कहना है कि समस्या का समाधान केवल तीनों कानूनों को समाप्त करने के बाद ही निकल सकता है। किसान नेताओं ने कहा कि जब तक समस्या का समाधान नहीं निकलता है, किसानों को प्रदर्शन जारी रखने के लिए रामलीला मैदान या जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने की अनुमति मिले तो सड़कों का जाम हटाए जाने पर विचार किया जा सकता है। इस पर अंतिम निर्णय सभी नेताओं की बैठक के बाद लिया जाएगा।
वहीं, भारतीय किसान संघ ने कहा है कि प्रस्तावित कमेटी में देश के सभी प्रमुख किसान संगठनों के प्रतिनिधियों को शामिल कर बहुमत से निर्णय लिया जाना चाहिए क्योंकि किसी भी मुद्दे पर सभी किसान संगठन एकमत नहीं हैं। वर्तमान आंदोलन में शामिल किसान संगठन पूरे देश के किसानों का प्रतिनिधित्व नहीं करते हैं।
किसान आंदोलन के प्रमुख चेहरे दर्शनपाल सिंह ने अमर उजाला से कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने बातचीत और समस्या का समाधान निकालने का एक विकल्प सुझाया है, इसका वे स्वागत करते हैं। लेकिन चाहे सरकार अपने स्तर पर बातचीत कर ले, या इस तरह की किसी कमेटी के माध्यम से बात करे, किसान अपनी मांगों से पीछे हटने को तैयार नहीं हैं।
ऑल इंडिया किसान संघर्ष समन्वय समिति के नेता डॉ. आशीष मित्तल ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने मामले के हल तक पहुंचने का एक रास्ता दिखाया है। यह किसानों की नैतिक जीत है। लेकिन इसके साथ ही यह स्पष्ट हो जाना चाहिए कि इस मंच से भी सरकार को तीनों कानूनों को वापस लेने पर ही समझौता करने को तैयार रहना चाहिए। किसान इससे कम पर विचार करने को भी तैयार नहीं हैं।
किसान शक्ति संघ के अध्यक्ष चौधरी पुष्पेंद्र सिंह ने कहा कि बातचीत के इस नए मंच का स्वागत है। लेकिन यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि जब तक कमेटी बातचीत कर किसी समाधान तक नहीं पहुंच जाती तब तक कानून को निलंबित रखा जाना चाहिए, इसके लिए उचित कानूनी प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि जहां तक सड़कों को खाली किए जाने की बात है, अगर केंद्र सरकार किसानों को रामलीला मैदान या जंतर-मंतर पर प्रदर्शन जारी रखने की अनुमति दे तो सड़कों को खोलने पर विचार किया जा सकता है। इस पर किसान नेताओं की सहमति से विचार किया जा सकता है।
कमेटी में शामिल हों सभी किसान संगठनों के प्रतिनिधि
वहीं, भारतीय किसान संघ के नेता हरपाल सिंह डागर ने कहा है कि अब सर्वोच्च न्यायालय ने भी मामले में आगे बढ़ने की बात कही है। किसानों की उचित शंकाओं का समाधान किया जा चुका है। अन्य मांगों पर भी बातचीत कर आंदोलन खत्म किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि देश में 600 से भी ज्यादा प्रभावी किसान संगठन हैं। कमेटी में हर संगठन के एक-एक प्रतिनिधि को शामिल कर बहुमत के आधार पर निर्णय लिया जाना चाहिए क्योंकि किसानों के बीच सभी मुद्दों पर पूरी तरह एकता नहीं है।