सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को भी किसानों के मुद्दे पर सुनवाई की और कहा कि एक कमेटी के जरिये इस मामले का हल निकालने की कोशिश की जानी चाहिए। कमेटी के सामने संबंधित पक्ष अपनी बात रखें और उसके निर्णय पर सहमति बनाने की कोशिश की जानी चाहिए। वहीं, किसानों ने कहा है कि कमेटी के जरिये बातचीत करने का अभी तक कोई प्रस्ताव उनके पास नहीं भेजा गया है।
वहीं केंद्र सरकार ने भी अभी तक इस तरह का कोई संदेश उन्हें नहीं भेजा है। अगर कोई संदेश आता है तो उसके जरिये हल निकालने की कोशिश की जाएगी। लेकिन तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने की उनकी मांग बरकरार रहेगी।
भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने अमर उजाला से बातचीत के दौरान कहा कि केंद्र सरकार का जिद्दी रवैया सामने आ रहा था। पिछले आठ दिन से सरकार बातचीत की कोई कोशिश नहीं कर रही थी। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने बातचीत को आगे बढ़ाने का एक तरीका निकाला है। इसका वे स्वागत करते हैं। हम कमेटी के जरिये बातचीत के दौरान भी तीनों कानूनों को वापस लेने की अपनी मूल मांग पर डटे रहेंगे। निजी क्षेत्रों से खरीद पर भी एमएसपी अनिवार्य किए जाने का मुद्दा भी प्रमुख रहेगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कृषि कानूनों को किसानों के हित में बता रहे हैं। ऐसे में कोई मंत्री इससे पीछे कैसे हटेगा और इस स्थिति में बातचीत का कोई समाधान कैसे निकलेगा? अमर उजाला के इस सवाल पर किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा कि उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बात और नीयत पर कोई शंका नहीं है। लेकिन वे केवल अधिकारियों की लिखी हुई बातों को ही दुहराते हैं। जब हमसे बातचीत होगी तो हम अपनी शंकाओं को उनके साथ साझा करेंगे और समाधान खोजा जाएगा।
कुछ किसान नेता कह रहे हैं कि इस सरकार में सभी शक्ति केवल प्रधानमंत्री के पास है और इसलिए वे केवल उनकी उपस्थिति में ही बातचीत करेंगे। क्या किसान इस तरह की मांग कर रहे हैं? टिकैत ने कहा कि संयुक्त किसान मोर्चा की तरफ से ऐसी कोई आधिकारिक मांग नहीं है। वे सभी मंचों से बातचीत को तैयार हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि शहर को घेरकर रखने के प्रदर्शन के तरीके को सही नहीं कहा जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी के बाद क्या किसान प्रदर्शन स्थल बदलने की रणनीति बदलने के लिए तैयार हैं? किसान नेता ने कहा कि उन्हें अभी सुप्रीम कोर्ट की ऐसी किसी टिप्पणी के विषय में कोई जानकारी नहीं है। लेकिन अगर ऐसा कुछ होता है तो संयुक्त किसान मोर्चा के नेताओं के साथ बैठकर इस मामले पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
हालांकि, कुछ किसान रामलीला मैदान या जंतर-मंतर पर धरना करने की अनुमति मिलने के बाद दिल्ली की सड़कों को जाम रखकर प्रदर्शन करने की रणनीति में बदलाव से सहमत हैं। किसानों को आशंका है कि अगर वे एक बार कमेटी के जरिये बातचीत और समाधान निकालने की बात पर प्रदर्शन खत्म कर देंगे तो सरकार उनकी मांगों पर कोई विचार नहीं करेगी। इसलिए जब तक कोई समाधान नहीं निकल जाता है, वे प्रदर्शन जारी रखना चाहते हैं।