किसान संगठनों की तरफ से आठ दिसंबर को बुलाए गए भारत बंद का व्यापक असर देखने को मिल सकता है। इसके कारण उत्तर भारत के सबसे ज्यादा प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। पश्चिम में महाराष्ट्र और दक्षिण में तमिलनाडु, आंध्रप्रदेश और तेलंगाना में भी इसका अच्छा असर पड़ने की संभावना है। मध्यप्रदेश, झारखंड और छत्तीसगढ़ में भी बंद का भारी असर पड़ सकता है।
किसान आंदोलन में प्रमुख भूमिका निभा रहे स्वराज पार्टी के नेता योगेंद्र यादव ने अमर उजाला से कहा कि किसान आंदोलन को कभी खालिस्तानी समर्थक, कभी विपक्षी राजनीतिक दलों की साजिश कहकर इसे खारिज करने की कोशिश की गई थी। लेकिन मंगलवार के भारत बंद को देखने के बाद सरकार को समझ आ जाएगा कि यह आंदोलन कौन चला रहा है। कल सरकार को होश आ जाएगा और किसानों के हित में तीनों कानूनों को वापस लेना पड़ेगा। इससे कम किसानों को कुछ भी स्वीकार्य नहीं होगा।
योगेंद्र यादव ने कहा कि कुछ टिप्पणियों से लोगों को गलतफहमी हो गई है। इसे स्पष्ट कर लिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसानों के भारत बंद के दौरान एंबुलेंस, इमर्जेंसी सेवाओं को पूरी तरह से छूट रहेगी, लेकिन सामान्य सेवाओं से उनकी अपील रहेगी कि वे किसानों को अपना समर्थन देने के लिए सड़कों पर न निकलकर किसानों का सहयोग करें। उन्होंने कहा कि इस आंदोलन और भारत बंद को केवल किसानों के हित से नहीं, बल्कि भारत के व्यापक हित से जोड़कर देखा जाना चाहिए।
ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस (AIMTC) के प्रवक्ता राजेंद्र कपूर ने कहा कि वे किसान संगठनों के साथ में हैं। उनके संगठन से जुड़े लगभग एक करोड़ ट्रक मंगलवार को सड़कों पर नहीं उतरेंगे। लेकिन चूंकि बंद केवल तीन बजे तक का रखा गया है, इसके बाद सामान्य सेवाएं बहाल हो जाएंगी। दिल्ली में चारों तरफ से ट्रकों के दिल्ली में प्रवेश पर प्रतिबंध है, इसलिए जब तक आवाजाही सामान्य नहीं होती, राजधानी में सेवाएं प्रभावित रहेंगी।
अनेक संगठन और राजनीतिक दल भारत बंद का समर्थन कर रहे हैं तो वहीं कई संगठन इस बंद के विरोध में भी हैं। व्यापारियों के बड़े संगठन कंफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट), ट्रक ऑपरेटर्स के संगठन ऑल इंडिया ट्रांसपोर्ट वेलफेयर एसोसिएशन (एटवा), भारतीय मजदूर संघ और भारतीय किसान संघ इसके विरोध में है। कैट नेता प्रवीण खंडेलवाल ने कहा है कि उनका संगठन भारत बंद नहीं करेगा और मंगलवार को दिल्ली के साथ-साथ देशभर में उनके संगठन से जुड़े सभी व्यावसायिक प्रतिष्ठान खुले रहेंगे।
भारतीय किसान संघ के दिल्ली प्रांत अध्यक्ष हरपाल सिंह डागर ने अमर उजाला से कहा कि इस समय सरकार दबाव में है। वह न्यूनतम समर्थन मूल्य देने को तैयार हो गई लगती है। किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य लेकर धरना-प्रदर्शन बंद कर देना चाहिए। इसके आगे की मांगें बातचीत के जरिए करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत बंद से किसान भाई अपने ही किसान भाइयों का नुकसान कर रहे हैं। उनका संगठन भारत बंद के पक्ष में नहीं है।