हाल ही में आई बाढ़ से प्रभावित उत्तरी केरल का वायनाड जिला एक अजीब परेशानी का सामना कर रहा है। यह पहाड़ी जिला अपनी समृद्ध जैव विविधता और मसाले की खेती के लिए मशहूर है। यहां बाढ़ आने से बड़ी संख्या में केंचुओं की मौत हो गई है। किसानों और स्थानीय लोगों का कहना है कि हजारों केंचुए रोजाना मिट्टी से मरे हुए निकल रहे हैं।
क्षेत्र का दौरा करने वाले कृषि और पर्यावरण वैज्ञानिकों का कहना है कि बाढ़ के पानी से मिट्टी हट गई थी और अब नई मिट्टी उसकी तरह काम नहीं कर रही है। वह अतिरिक्त पानी और नमी को अवशोषित करने में असमर्थ है। बता दें केंचुए खेती के लिए एक इंडीकेटर की तरह काम करते हैं जो मिट्टी को उलटने पलटने के लिए जरूरी होता है।
कॉफी की खेती करने वाले किसान जॉन थॉमस ने कहा, 'बीते दो दिनों से हम इसका अनुभव कर रहे हैं। हजारों की संख्या में कीड़े मकौड़े मिट्टी से बाहर आ रहे हैं और मर रहे हैं। शुरुआत में मुझे लगा कि ये सिर्फ मेरे खेत में ही हो रहा है, लेकिन बाद में कई और लोगों ने इसकी शिकायत की।' थॉमस ने आगे कहा कि जब बारिश रुकी और धूप निकली, तो गिली मिट्टी सूखने लगी, कई जगह दरारें पड़ने लगीं। लेकिन इसपर विस्तृत जांच ही परेशानी के पीछे की वजह बता पाएगी।
मामले पर क्षेत्रीय कृषि अनुसंधान स्टेशन के असोसिएट डायरेक्टर पी राजेंद्रन का कहना है, 'हम उपरी मिट्टी के हटने को ही दोषी नहीं ठहरा सकते। वायनाड दक्कन पठार का ही हिस्सा है। यहां कि मिट्टी बहुत संवेदनशील है और किसी भी तरह के बदलाव से उसके ढांचे में बदलाव होने लगता है। घास के मैदानों को खत्म करना और निर्माण कार्य ने वायनाड की नाजुक पारिस्थितिकी को नुकसान पहुंचाया है।'
अगर आगे भी यही सब चलता रहा तो यह मिट्टी के सूक्ष्म जीवों को प्रभावित करेगा। जिससे धान और काली मिर्च की खेती भी प्रभावित होगी। बता दें इस जिले की काली मिर्च पूरी दुनिया में मशहूर है। वहीं एक अन्य विशेषज्ञ का कहना है कि केंचुए काफी नाजुक होते हैं। उनकी मौत के लिए केवल गर्मी को ही दोषी नहीं ठहराया जा सकता। इस घटना के बारे में जानने के लिए विस्तृत जांच की जरूरत है।