सिंघु बॉर्डर पर किसानों का आंदोलन पूरे चरम है। किसान संगठन और सरकार के बीच बातचीत में अब तक कोई ठोस हल नहीं निकल पाया है। किसानों ने सरकार से साफ कह दिया है कि वे अपनी मांगों से टस से मस नहीं होंगे।
किसान लगातार केंद्र सरकार पर हमला बोल रहे हैं। हरियाणा और पंजाब के किसानों का आरोप है कि पराली और नशाखोरी में सरकारें हमें बदनाम कर रही हैं। पराली की समस्या का हम भी ठोस हल चाहते हैं, लेकिन सरकार कोई मदद ही नहीं कर रही है। हम तो चाहते हैं पाकिस्तान के साथ भी व्यापार खुले।
हरियाणा के सोनीपत से आए किसान कपूर सिंह ने अमर उजाला से कहा, 'हम लोग पराली जलाना ही नहीं चाहते हैं लेकिन सरकार इसके खरीदने की कोई उचित व्यवस्था तो करे। अगर हम पराली नहीं हटाएंगे तो हम अगली फसल की बुआई कैसे करेंगे। केंद्र सरकार को इसके लिए ब्रिकी केंद्र खोलने चाहिए ताकि हम इसे बेच सकें।'
कैथल के भारतीय यूनियन किसान के जिला अध्यक्ष मंजीत भाई ने अमर उजाला से कहते है, 'हम पराली नहीं जलाना नहीं चाहते हैं। पराली के जलाने से हमारी जमीन भी खराब होती है। अक्टूबर से दिसंबर माह तक ये होती है। हम इतनी भी नहीं जलाते हैं जितना सरकारें हमें बदनाम कर रही हैं। 80 प्रतिशत तक पराली चारे के रुप में प्रयोग में लेते हैं। हम तो खुद परेशान होकर सरकार को मुफ्त में पराली देने को तैयार हैं लेकिन सरकार इसे ले तो सही।'
नहीं मिल रही है फसलों की पूरी कीमत
पंजाब से आए किसान कुलवंत सिंह ने कहा कि,आज हमें हमारी फसलों की उचित कीमतें भी नहीं मिल रही हैं। पहले जब पाकिस्तान के साथ व्यापार संबंध था तो हमारे यहां से बड़ी मात्रा में फल, सब्जियां और अनाज जाता था लेकिन अब उतना नहीं जाता है। पहले इससे व्यापार भी बढ़ता था लेकिन मोदी सरकार के आने से ये भी कम हो गया हैं। भारत में हमें अपनी फसलो की उतनी अच्छी कीमत भी नहीं मिल रही जितनी मिलनी चाहिए।
पंजाब के किसान जसबीर सिंह बताते हैं कि, केंद्र और राज्य सरकार चाहें तो पंजाब में नशाखोरी केवल दस दिनों के भीतर बंद हो सकती है। लेकिन दोनों सरकारें ऐसा नहीं करना चाहती हैं।आज किसान आंदोलन में सैकड़ों युवा लोग है लेकिन कोई नशा नहीं कर रहा है। सरकारे हमें यूही बदनाम करने में लगी हुई हैं।
किसानों ने भारत बंद की तैयारी शुरु की
केंद्र सरकार के तीन कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों ने आंदोलन की तैयारी तेज कर दी है। किसानों ने आठ दिसंबर को भारत बंद का एलान किया है। किसानों ने कल देशभर में प्रधानमंत्री मोदी का पुतला फूंकने का भी एलान किया।
किसान नेताओं का कहना है कि, सभी किसानों को भी दिल्ली आने को बोल दिया गया है। अब लड़ाई आर पार की होगी। पीछे हटने का सवाल ही नहीं उठता। काॉंट्रैक्ट फ़ार्मिंग किसान को मंज़ूर नहीं है। हम डेडलाइन नहीं दे रहे हम सरकार को बता रहे हैं स्थिति ऐसे ही रही तो हर राज्य से और जत्थे दिल्ली लाए जाएंगे।