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मौसम की चाल न समझ पाने से किसानों को हो रहा नुकसान, तापमान बढ़ने से फसल में रोग

Mon, 13 Jul 2020 05:57 AM IST
अवधेश कुमार मनीष मिश्र अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि की बढ़ती घटनाएं
  • अधिक गर्मी और देर से ठंडक गेहूं किसानों के लिए सिरदर्द
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फाइल फोटो - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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भगवान मीणा ने इस साल गेहूं की फसल बड़ी मेहनत से पैदा की थी, लेकिन फरवरी-मार्च में बेमौसम बारिश और ओलों से उन्हें काफी नुकसान उठाना पड़ा। किसानों के लिए मौसम की ये बेदर्दी हर साल बढ़ती ही जा रही है। भगवान मीणा पिछले कई सालों से गेहूं की फसल में लगातार बढ़ती जा रही दिक्कतों के बारे में बताते हैं, पहले रोग कम लगता था, अब गेहूं के पौधों पर इल्लियां भी लगने लगी हैं। जनवरी और फरवरी में बारिश और ओले गिरना तो आम हो गया है। अब तो गेहूं की खेती में बुआई से लेकर कटाई तक अनिश्चितता ही बनी रहती है।
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मौसम में बदलाव से गेहूं की फसल में बढ़ रही दिक्कतों को मध्य प्रदेश के सिहोर जिले के गांव बांकोट में रहने वाले भगवान मीणा भले ही नहीं समझ पा रहे, लेकिन वैज्ञानिक इसे जलावायु परिवर्तन का सीधा असर कहते हैं। जिसका असर फसलों में लगातार बढ़ता जा रहा है। वातावरण में तापमान के बढ़ने से गेहूं की पैदावार पर विपरीत असर पड़ने की बात भी कई शोध में कही गई है। 

गेहूं और मक्का की रिसर्च के लिए मोरक्को स्थित अंतरराष्ट्रीय संस्थान ‘सिमिट’ के एशिया के प्रतिनिधि एवं प्रबंध निदेशक डॉ. अरुण जोशी कहते हैं, जलवायु परिवर्तन का असर कई तरह से होता है, लेकिन मुख्य दो कारण हैं-गर्मी बढ़ेगी और पानी की उपलब्धता कम हो जाएगी। कहीं बाढ़ और कहीं सूखे जैसी स्थिति होगी। गेहूं की फसल बोते समय अगर गर्मी पड़ती है तो दिक्कत, कई तरह से रोग लगने शुरू हो गए हैं। जैसे पहले टिड्डी नवंबर के बाद नहीं आती थीं, अब आने लगी हैं, पीला रतुआ रोग पंजाब, हरियाणा और हिमाचल में फैलने लगा है, पहले वहीं आता था जहां तापमान कम होता था। कई बीमारियां फसलों में तेजी से फैलने लगी हैं।”   
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एक डिग्री पारा बढ़ने से 8% कम पैदा होगा गेहूं  

प्रतिष्ठित जर्नल नेचर में छपे एक शोधपत्र के अनुसार, विश्व में वातावरण का तापमान 1 डिग्री सेल्सियस बढ़ने से गेहूं की पैदावार 4.1 से 6.4 प्रतिशत तक कम हो जाएगी। जबकि भारत में 1 डिग्री तापमान बढ़ने से 8% तक गेहूं का उत्पादन कम होने के आसार हैं। शोध में कहा गया कि जलवायु परिवर्तन की वजह से भारत में वर्ष 2050 तक 6-23% तक गेहूं का उत्पादन कम हो जाएगा, वर्ष 2080 तक 15-25% तक उत्पादन कम होगा।

बेमौसम बारिश और तापमान से उत्पादन पर असर

भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. रतन तिवारी बताते हैं, “गेहूं को गर्मी से ज्यादा नुकसान है, अब ठंडक देरी से आती है। गेहूं में जब फूल आते हैं तो औसत तापमान 20-25 डिग्री सेल्सियस होना चाहिए। लेकिन जब यही तापमान 30 डिग्री के ऊपर पहुंच जाता है तो नुकसानदायक होता है, दाने तो बन जाते हैं पर बाली भर नहीं पातीं और दाने छोटे रह जाते हैं।” 

तिवारी कहते हैं, मार्च में अचानक बारिश और ओले गिरने से गेहूं गिर जाता है और हल्का हो जाता है। फरवरी में जल्दी गर्मी आ जाने से पकना शुरू हो जाता है और पूरा समय नहीं मिल पाता। मतलब बाली में दाना हल्का रहता है।  गेहूं की फसल में झटके बहुत आते हैं, अब उन नई किस्मों पर काम किया जा रहा है जो बढ़ते तापमान को झेल लें, अब जो नई किस्में आ रही हैं वो बढ़ते तापमान को झेल ले रही हैं।

नई किस्म के लिए सिमिट

दुनिया में गेहूं की बौनी प्रजाति विकसित करने वाले चर्चित वैज्ञानिक डॉ. बोरलॉग के नाम से मोरक्को में ‘सिमिट’ की स्थापना की गई थी, जो मौसम के अनुकूल गेहूं की नई-नई किस्मों को विकसित करने पर लगातार काम करता रहता है। कई रिपोर्ट्स भारत में लगातार बढ़ते तापमान को गेहूं की फसल के प्रभावित होने के रूप में लेनी लगी है।

गेहूं के उत्पादन में  भारत की स्थिति
 
देश रैंक
चीन 1
भारत 2
रुस 3
अमेरिका 4
कनाडा 5

(स्रोत: स्टैटिस्टाडॉटकाम)
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भारत में पिछले पांच वर्षों में गेहूं का उत्पादन
 
वर्ष उत्पादन (मिलियन टन)
2016 87
2017 98.5 
2018 99.8
2019 103.6
2020 107.1
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