फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

किसान नेता कृषि मंत्री तोमर से बोले- बेटी की शादी है क्या जो सीधे आकर बैठ जाएं

Wed, 09 Jun 2021 07:06 PM IST
Harendra Chaudhary डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

किसान नेता हनान मौला ने अमर उजाला से चर्चा करते हुए कहा कि किसान संगठन सरकार से पहले दिन से ही बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन सरकार की तरफ से वार्ता के लिए अब तक कोई मसौदा ही नहीं तैयार किया गया है...
विज्ञापन
आंदोलन करते किसान - फोटो : PTI (फाइल फोटो)
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

दिल्ली की सीमाओं पर नए कृषि कानूनों के खिलाफ किसान संगठनों का सात माह से प्रदर्शन जारी है। इस बीच केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने किसानों के साथ दोबारा से बातचीत शुरू करने का बयान देकर गेंद किसानों के पाले में डाल दी है। सरकार के इस प्रस्ताव को किसान नेताओं ने कोरी बयानबाजी करार दिया है।

विज्ञापन


किसान नेता हनान मौला ने अमर उजाला से चर्चा करते हुए कहा कि किसान संगठन सरकार से पहले दिन से ही बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन सरकार की तरफ से वार्ता के लिए अब तक कोई मसौदा ही नहीं तैयार किया गया है। हम मानते हैं कि चर्चा से ही समाधान निकल सकता है। लेकिन केंद्र सरकार के मंत्री ऐसे बयान देकर केवल खानापूर्ति कर रहे हैं। वे नहीं चाहते हैं कि किसान संगठनों से कोई चर्चा हो।

अगर केंद्र सरकार को चर्चा करनी है तो सभी किसान संगठनों और उनके प्रतिनिधियों को विज्ञान भवन में चर्चा करने के लिए प्रस्ताव भेजे। सभी नेताओं को पत्र भेजकर वार्ता के लिए दिन और समय तय करे। हम लोग पहले की तरह उपस्थित हो जाएंगे।
विज्ञापन


कृषि मंत्री के बयान पर मौला ने कहा, आज केंद्र सरकार की जिम्मेदारी है कि हमसे चर्चा की शुरुआत करे। ये कोई बेटी की शादी है क्या जो सीधे आकर खाने की पंगत में बैठ जाए। हम चाहते हैं कि सरकार कृषि कानूनों के विषयों पर बिंदुवार चर्चा करें।

बुधवार को केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि केंद्र सरकार लगातार किसानों के हित में काम कर रही है। सरकार नए कृषि कानून को लेकर आंदोलन कर रहे किसानों से बातचीत के लिए तैयार है। आंदोलन कर रहे किसान नए कानूनों पर बातचीत के लिए सही तर्कों के साथ आएं, हम बातचीत के लिए हमेशा तैयार हैं।

बता दें कि किसान संगठन और नेता पिछले साल नवंबर से तीन नए कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली की सीमाओं पर आंदोलन कर रहे हैं। इसे लेकर केंद्र और किसानों के बीच कई दौर की वार्ता हुई, लेकिन कोई हल नहीं निकल सका। सुप्रीम कोर्ट ने 11 जनवरी को इन तीनों कानूनों को अगले आदेश तक लागू करने पर रोक लगा दी थी। साथ ही गतिरोध को सुलझाने के लिए 11 जनवरी को इन तीनों कानूनों को अगले आदेश तक लागू करने पर रोक लगा दी थी। किसान संगठन अपने जिद पर अड़े हुए हैं और उन्होंने इस समिति के समक्ष पेश होने से भी इंकार कर दिया।

पिछले हफ्ते भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने कहा था कि वे पीछे नहीं हटने वाले हैं। किसानों का आंदोलन 2024 तक जारी रहेगा। राकेश टिकैत ने कहा कि 'सरकार निश्चित तौर से इन कानूनों को वापस लेने के लिए राजी हो जाएगी। कानून 2024 तक वापस लिया जाएगा। यह तीन साल में निश्चित होगा। कानून वापस हो जाएगा। आपको बता दें कि देश की मौजूदा एनडीए सरकार का कार्यकाल साल 2024 में खत्म होगा।

विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें