मसौदे के मुताबिक किसी कानून का उल्लंघन करने वाले, उत्पीड़न करने वाले, देश की एकता-अखंडता या सौहार्द को नुकसान पहुंचाने वाले, आपत्तिजनक या अश्लील सामग्री का सोशल मीडिया में पोस्ट किया जाना प्रतिबंधित होगा। सरकार का मानना है कि इसके जरिए व्हाट्सऐप, फेसबुक और ट्विटर जैसे सोशल मीडया प्लेटफार्म पर आने वाले भड़काऊ, फर्जी संदेशों या खबरों पर पूरी तरह से रोक लगेगी। विभिन्न पक्षों की राय मिलने के बाद सरकार आईटी एक्ट इंटरमीडियटरी नियम लेकर आएगी। हालांकि मसौदे में उल्लंघन के बाद की जाने वाली कार्रवाई का कोई ब्यौरा नहीं दिया गया है।
मसौदे में कहा गया है कि गलत या निर्देशों का अनुपालन नहीं करने वाले संदेशों को कंपनियों को तत्काल हटाना होगा। साथ की किसी भी मामले में कानून को कायम रखने के मद्देनजर कंपनियां 72 घंटों के भीतर सरकार की एजेंसी, साइबर सुरक्षा या जांच एजेंसी को सूचित कर सकती हैं। कंपनियों को सूचना की सुरक्षा से जुड़े तमाम प्रबंध करने होंगे जो सूचना प्रौद्योगिकी नियम, 2011 के तहत हैं। सुप्रीम कोर्ट के श्रेया सिंघल फैसले का हवाला देते हुए मसौदे में कहा गया है कि देश की सुरक्षा, सौहार्द, अखंडता, मित्र देशों, कानून व्यवस्था, अदालत की अवमानना या मानहानि के मामले में कंपनियों द्वारा कंप्यूटर संसाधन से कोई छेड़छाड़ किए बगैर 24 घंटे के भीतर मामले की सूचना देनी होगी।
गौरतलब है कि आईटी मंत्रालय ने कई बार व्हाट्सऐप को फर्जी संदेशों पर रोक लगाने के लिए ताकीद किया है, लेकिन एनक्रिप्शन का हवाला देकर उसकी ओर से कोई सख्त कदम नहीं उठाया गया। साथ ही फर्जी संदेश कहां से शुरू हो रहा है यह जानकारी देने के बारे में भी कोई आश्वासन नहीं दिया गया। माना जा रहा है कि इसी के मद्देनजर सरकार यह संशोधन करने जा रही है।