पिछले लोकसभा चुनाव के दौरान दिल्ली की सातों सीटों पर जीत दर्ज करने वाली भाजपा के सामने अगले आम चुनाव में अपना रिकॉर्ड बनाए रखने की चुनौती है। केंद्रीय नेतृत्व ने वरिष्ठ नेता अरुण सिंह को लोकसभा चुनाव की विशेष जिम्मेदारियों के साथ दिल्ली भेजा है। लेकिन जिस समय अरुण सिंह चुनाव के मद्देनजर पार्टी को तैयार करने में लगे हैं, पार्टी के बीच बढ़ रही गुटबाजी पार्टी को नुकसान पहुंचा सकती है।
विधानसभा चुनाव में हुआ था बड़ा नुकसान
पिछले विधानसभा चुनाव में केंद्रीय नेतृत्व ने पार्टी के पूर्वांचली नेताओं-कार्यकर्ताओं की कथित रुप से उपेक्षा कर दी थी। सीटों के बंटवारे में पूर्वांचली कार्यकर्ताओं को बेहद कम प्रतिनिधित्व दिया गया था। इसका सीधा असर हुआ कि पूर्वांचली नेताओं ने पार्टी का साथ नहीं दिया जिसके कारण पार्टी को भारी नुकसान हुआ और पार्टी 70 सीटों की विधानसभा में महज तीन सीटें जीत सकी।
लोकसभा चुनाव से पहले गुटबाजी रोकना पार्टी के सामने चुनौती
प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी ने इसके पहले भी पार्टी नेताओं के लगातार असहयोगात्मक रवैये के बारे में केंद्रीय नेतृत्व को बताया था। केंद्रीय नेता श्याम जाजू और अरुण सिंह के सामने भी यह बात आ चुकी है। विधानसभा चुनाव की तरह अगर इस बार लोकसभा चुनाव के समय भी पार्टी एकजुट नहीं हो सकी तो पार्टी के सामने दिक्कत हो सकती है। यही कारण है कि समय रहते इस गुटबाजी से निजात पाना केंद्रीय नेतृत्व के सामने असली चुनौती है।