इन दिनों भारतीय सेना में एक पत्र की जोरों पर चर्चा है। इस पत्र में 1965 और 1971 में पाकिस्तान के खिलाफ हुई जंग में हिस्सा ले चुके पूर्व सैनिकों को 15 लाख रुपये की आर्थिक मदद देने की बात कही गई है। यह राशि 'युद्ध सम्मान योजना' के तहत दिए जाने की बात कही गई है। वहीं, यह पत्र पूर्व सैनिकों के बीच तेजी से वायरल हो रहा है। कुछ लोग इस पत्र को फेक बता रहे हैं। वहीं कुछ लोग इसकी सच्चाई जानने के लिए जिला सैनिक कल्याण बोर्ड के चक्कर काट रहे हैं। कई बोर्डों पर कर्मचारियों ने बकायदा नोटिस लगा कर इस बारे में कोई जानकारी न होने की बात तक लिख दी है। वहीं, अमर उजाला ने इस पत्र की सच्चाई जानने के लिए सेना से संपर्क किया। जहां इस पत्र के बारे में कई जानकारियां निकल कर सामने आईं।
क्या लिखा है इस पत्र में?
इस पत्र में लिखा गया है कि 'युद्ध सम्मान योजना' के तहत पूर्व सैनिक कल्याण विभाग (DESW) और रक्षा मंत्रालय ने 1965 और 1971 की जंग में सक्रिय तौर पर शामिल होने वाले पेंशनर एवं नॉन पेंशनर सैनिकों के बारे में जानकारी देने को कहा है। 8 अगस्त को जारी इस पत्र में ऐसे पूर्व सैनिकों को 15 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की बात कही गई है। इस पत्र में राज्य सैनिक कल्याण बोर्डों से 1965 और 1971 की जंग में हिस्सा लेने वाले इमरजेंसी कमीशंड ऑफिसर्स, शॉर्ट सर्विस कमीशन ऑफिसर्स, रेगुलर कमीशंड ऑफिसर्स, सिविलियन पर्सनल और पर्सनल बिलो ऑफिसर रैंक (PBORs) के बारे में जानकारी मांगी गई है।
कोई रिकॉर्ड मेनटेन नहीं!
पत्र में कहा गया है कि 1965 और 1971 की लड़ाई में जिन लोगों को समर सेवा स्टार या पूर्वी स्टार या पश्चिमी स्टार मेडल मिले हैं, उनके बारे में जानकारी एकत्र की जाए। इस पत्र के साथ 29 मई, 2024 का एक औऱ पत्र संलग्न है। इस पत्र में रक्षा मंत्रालय के एक पुराने पत्र (26-09-2022) का हवाला देते हुए, उसका जवाब देते हुए पूर्व सैनिक कल्याण विभाग ने लिखा है कि उनके पास में 1965 और 1971 की लड़ाई में हिस्सा लेने वाले पर्सनल बिलो ऑफिसर रैंक (PBORs) और रेगुलर कमीशंड ऑफिसर्स के बारे में कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है, क्योंकि उस समय पूरी सेना जंग में कूद गई थी और कोई रिकॉर्ड मेनटेन नहीं किया गया था। वहीं, उनसे कई PBORs और रेगुलर कमीशंड ऑफिसर्स ने मुलाकात की है और 'युद्ध सम्मान योजना' के तहत फायदा दिए जाने की मांग की है।
इंकार का कोई लीगल ग्राउंड नहीं, बढ़ेंगे मुकदमे
पूर्व सैनिक कल्याण विभाग ने आगे लिखा है कि 'युद्ध सम्मान योजना' के तहत अगर विभाग ने दोनों लड़ाइयों में हिस्सा ले चुके इमरजेंसी कमीशंड ऑफिसर्स, शॉर्ट सर्विस कमीशन ऑफिसर्स और समर सेवा स्टार या पूर्वी स्टार या पश्चिमी स्टार मेडल से सम्मानित लोगों को एक मुश्त 15 लाख रुपये की रकम देने का फैसला करती है, तो इन लड़ाइयों में शामिल होने वाले इन पदकों से सम्मानित (पेंशनर और नॉन पेंशनर PBORs और रेगुलर कमीशंड ऑफिसर्स) दूसरे लोग भी आकर समान बेनिफिटस देने की मांग करेंगे। जिससे विभाग पर कानूनी प्रक्रिया का बोझ बढ़ेगा और उनके पास उन्हें इनकार करने का कोई लीगल ग्राउंड नहीं है। वहीं, भारतीय सेना की लिटिगेशन ब्रांच यानी जज एडवोकेट जनरल (JAG) की सलाह का जिक्र करते हुए लिखा है कि सरकारी संस्थानों से पेंशन ले रहे सैन्य कर्मियों को भी इस प्रस्ताव में शामिल किया जाए।
इन लोगों को मिलेगा लाभ
वहीं जब अमर उजाला ने सेना ने इस पत्र की सच्चाई जानी तो सूत्रों ने इसकी पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि जिला सैनिक कल्याण बोर्डों से 1971 और 1965 की जंग में हिस्सा लेने वाले इमरजेंसी कमीशंड ऑफिसर्स, शॉर्ट सर्विस कमीशन ऑफिसर्स, समर सेवा स्टार या पूर्वी स्टार या पश्चिमी स्टार मेडल से सम्मानित लोगों और उनके आश्रितों के बारे में जानकारी मांगी गई है।
जिसके तहत ऐसे कर्मियों या उनके आश्रितों तो 15 लाख रुपये देने का प्रस्ताव रखा गया है। इसके लिए उन परिवारों का डाटा जुटाया जा रहा है। सूत्रों ने बताया कि 'युद्ध सम्मान योजना' के तहत मिलने वाले 15 लाख रुपये की एकमुश्त रकम उन्हीं लोगों को मिलेगी, जिन्हें किसी तरह की कोई पेंशन नहीं मिलती है। इसके अलावा इस योजना का लाभ रेगुलर कमीशंड अफसरों को नहीं मिलेगा। इस योजना के लाभार्थियों को लेकर सेना के अलावा नेवी हेडक्वॉर्टर और एयर फोर्स हेड क्वॉर्टर से भी जानकारी मांगी गई है। हालांकि उन्होंने योजना के लागू होने को लेकर कोई समयसीमा या कब पैसा मिलेगा, इस बात की कोई जानकारी होने से साफ इंकार कर दिया।
सरकार क्यों नहीं कर रही पब्लिसिटी?
वहीं रिटायर्ड कर्नल सुधीर कुमार चौधरी का कहना है कि इस योजना की लोगों को बेहद कम जानकारी है। वह कहते हैं कि हालात ये हैं कि कई पूर्व सैनिक जिला सैनिक कल्याण बोर्ड पहुंच रहे हैं, लेकिन उनके पास इसे लेकर कोई सूचना नहीं है, यहां तक कि कई जगहों पर बोर्ड कर्मचारियों ने बाहर इस संदर्भ में कोई जानकारी न होने के नोटिस चिपका दिए हैं। रक्षा मंत्रालय ने न तो कोई सार्वजनिक तौर कोई सूचना जारी की है औऱ न ही कोई पब्लिसिटी की है। देश में कई पूर्व सैनिक दूरदराज इलाकों में रहते हैं, उन तक इसकी कोई सूचना नहीं पहुंची है। वह कहते हैं कि होना यह चाहिए था कि केंद्र सरकार पहले इसकी पब्लिसिटी करती और फिर राज्य सरकारों के जरिए जिलों-जिलों तक पहुंचाना था। साथ ही टीवी चैनलों पर भी इसकी जानकारी दी जानी चाहिए थी।
क्या हरियाणा चुनाव हैं वजह?
वहीं पूर्व सैनिकों ने इसे सरकार का प्रोपेगंडा बताया है। उनका कहना है कि हरियाणा के चुनाव नजदीक आ गए हैं और हरियाणा में काफी संख्या में पूर्व सैनिक रहते हैं। इस योजना की ज्यादा चर्चा झज्जर जिले में है, जहां काफी संख्या में पूर्व सैनिक रहते हैं। सरकार चुनावों से पहले सैनिकों के परिवारों के वोट बटोरना चाहती है। वह सवाल उठाते हुए कहते हैं कि दोनों लड़ाइयों को हुए 50 साल से ज्यादा का वक्त हो चुका है। उनमें से अधिकांश कर्मियों की औसतन उम्र अब 75 साल के आसपास होगी। ऐसे में बेहद कम संख्या में कर्मी या उनके आश्रित ही जीवित बचे होंगे। सरकार चाहती तो इस योजना को काफी पहले ही ला सकती थी, लेकिन हरियाणा चुनावों को देखते हुए इसे लाया गया है।
भेजना होगा यह रिकॉर्ड
वहीं 'युद्ध सम्मान योजना' का लाभ पाने के लिए पूर्व सैनिकों को अपने दस्तावेज जैसे डिस्चार्ज बुक, पीपीओ, आधार कार्ड, पेन कार्ड, बैंक खाते की पासबुक, पिछले 5 वर्ष की आयकर रिटर्न, वर्तमान में उसका व्यवसाय औऱ वार्षिक आय का ब्यौरा, प्रॉपर्टी जैसे कृषि भूमि, मकान, प्लॉट आदि के दस्तावेज, संलग्न प्रपत्र में भरकर मय पूर्ण विवरण सहित अपने संबंधित रिकार्ड कार्यालय को सीधा भेजना है।