वाराणसी: लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट बाबतपुर।
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स्वतंत्रता दिवस यानी 15 अगस्त से बेंगलुरु और वाराणसी हवाई अड्डों पर यात्रियों को प्रवेश उनका चेहरा पहचानकर मिल जाएगा। यह संभव होगा इन एयरपोर्ट पर लगने वाली फेशियल रिकग्निशन टेक्नालॉजी (एफआरए) से। नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने बताया कि डिजि यात्रा प्रोजेक्ट के पहले चरण के तहत एफआरए की स्थापना होगी।
ट्विटर पर सिंधिया ने बताया, उन्होंने डिजि प्रोजेक्ट पर मंत्रालय की सलाहकार समिति की बैठक की, जिसमें विभिन्न राजनीतिक दलों के सदस्य भी मौजूद रहे। नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने बताया कि डिजि यात्रा विकेंद्रीकृत मोबाइल वॉलेट आधारित पहचान प्रबंधन प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराएगी। इसकी लागत कम है। यह गोपनीयता और डाटा सुरक्षा के नजरिए से भी उपयुक्त है।
डिजि यात्रा फाउंडेशन (डीवाईएफ) अखिल भारतीय स्तर की इकाई होगी और यात्री पहचान सत्यापन प्रक्रिया की संरक्षक होगी। डीवाईएफ संयुक्त उद्यम कंपनी है, जिसका गठन कंपनीज एक्ट-2013 की धारा 8 के तहत किया गया है। इसमें 26 फीसदी हिस्सेदारी भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण और बाकी निजी कंपनियों की है। इसके तहत बेंगलुरु, दिल्ली, हैदराबाद, मुंबई और कोच्चि एयरपोर्ट हैं। मंत्रालय के मुताबिक, अगले साल मार्च से पुणे, विजयवाड़ा, कोलकाता, दिल्ली और हैदराबाद में डिजि यात्रा प्रोजेक्ट लागू होगा।
कागज और संपर्क रहित होगी तकनीक
इस तकनीक में यात्री के बोर्डिंग पास पर मौजूद विवरण का इस्तेमाल किया जाएगा। यह एफआरए से लिंक होगा। इसके बाद मुसाफिर को किसी भी चेक प्वाइंट पर न तो किसी कागज के इस्तेमाल की जरूरत होगी और न ही किसी के संपर्क में आने की। एफआरए यात्री को पहचानकर पथ सुगम करेगी।