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सत्ता में आने के पहले क्या थे मोदी: संघ से कैसे जुड़े वडनगर के नरेंद्र, मुख्यमंत्री बनने तक का सफर कैसा रहा?

स्पेशल डेस्क, अमर उजाला Published by: रिया दुबे Updated Thu, 17 Sep 2026 08:25 AM IST

सार

पीएम मोदी का वडनगर से शुरू हुआ सफर, सेना में जाने के सपने, आध्यात्मिक यात्राओं और संघ से जुड़ाव से होते हुए भाजपा के संगठन तक पहुंचा। करीब तीन दशक के संगठनात्मक सफर के बाद 2001 में गुजरात की सत्ता की कमान मिली। लेकिन मुख्यमंत्री बनने से पहले के इन पड़ावों ने कैसे तैयार की सत्ता के शीर्ष तक पहुंचने की राह? आइए जानते हैं।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी - फोटो : Amar Ujala

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज यानी 17 सितंबर को अपना 76वां जन्मदिन मना रहे हैं। इस बार जन्मदिन के साथ उनके राजनीतिक सफर का एक अहम पड़ाव भी जुड़ा है। 7 अक्तूबर 2001 में गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने के बाद 2026 में सत्ता के शीर्ष पर उनके 25 साल पूरे हो रहे हैं। 

इस मौके पर भारतीय जनता पार्टी ने 17 सितंबर से 17 अक्तूबर तक देशभर में 'सेवा संकल्प अभियान' चलाने की घोषणा की है। अभियान के तहत अलग-अलग सेवा और जनसंपर्क से जुड़े कार्यक्रम होंगे। पीएम मोदी के सत्ता में 25 साल पूरे होने की इस कहानी को समझने के लिए कई दशक पीछे जाना होगा। ऐसे में आइए जानते हैं कि मुख्यमंत्री बनने से पहले नरेंद्र मोदी के जीवन में कौन-कौन से पड़ाव आए और उनका यह सफर कैसे आगे बढ़ता गया?

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी - फोटो : Amar Ujala
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज यानी 17 सितंबर को अपना 76वां जन्मदिन मना रहे हैं। इस बार जन्मदिन के साथ उनके राजनीतिक सफर का एक अहम पड़ाव भी जुड़ा है। 7 अक्तूबर 2001 में गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने के बाद 2026 में सत्ता के शीर्ष पर उनके 25 साल पूरे हो रहे हैं। 

इस मौके पर भारतीय जनता पार्टी ने 17 सितंबर से 17 अक्तूबर तक देशभर में 'सेवा संकल्प अभियान' चलाने की घोषणा की है। अभियान के तहत अलग-अलग सेवा और जनसंपर्क से जुड़े कार्यक्रम होंगे। पीएम मोदी के सत्ता में 25 साल पूरे होने की इस कहानी को समझने के लिए कई दशक पीछे जाना होगा। ऐसे में आइए जानते हैं कि मुख्यमंत्री बनने से पहले नरेंद्र मोदी के जीवन में कौन-कौन से पड़ाव आए और उनका यह सफर कैसे आगे बढ़ता गया?

पीएम मोदी के बचपन की तस्वीर और उनका घर - फोटो : narendramodi.in

वडनगर से शुरू हुई मोदी की कहानी

नरेंद्र मोदी का जन्म 17 सितंबर 1950 को गुजरात के वडनगर में हीराबेन और दामोदरदास मोदी के घर हुआ। 1955 में नरेंद्र मोदी ने वडनगर प्राथमिक कुमार शाला में पढ़ाई शुरू की। 1957 के आसपास स्कूल के बाद वे अपने पिता की चाय की दुकान पर मदद करने लगे। 1962 में भारत-चीन युद्ध ने उनके मन पर असर डाला। उन्होंने जामनगर के सैनिक स्कूल बालाचड़ी में दाखिले के लिए आवेदन किया। हालांकि, वे दाखिला नहीं ले सके। कहा जाता है कि करीब 12 साल की उम्र में उन्होंने गांधीवादी नेताओं के साथ गोरक्षा को लेकर पहला उपवास किया था।

वडनगर - फोटो : narendramodi.in

युद्ध के दौरान सैनिकों को पिलाई चाय

प्रधानमंतत्री नरेंद्र मोदी की अपनी वेबसाइट नरेंद्र मोदी डॉट इन के मुताबिक 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान वे मेहसाणा रेलवे स्टेशन पर सीमा की ओर जाने और वहां से लौटने वाले सैनिकों को चाय पिलाते थे।

17 साल की उम्र में छोड़ा घर

1967 में बीएन हाई स्कूल, वडनगर से पढ़ाई पूरी करने के बाद करीब 17 साल की उम्र में युवा नरेंद्र ने घर छोड़ दिया। उनका उद्देश्य आध्यात्मिक यात्रा करना था। इस दौरान उनकी मुलाकात एकनाथ रानाडे से हुई। रानाडे से मुलाकात के बाद वे विवेकानंद रॉक मेमोरियल के लिए चंदा जुटाने के अभियान से जुड़े। इस अभियान में लोगों से एक-एक रुपये का सहयोग लिया जाता था।

बेलूर मठ से अल्मोड़ा तक का सफर

1968 में वे बेलूर मठ पहुंचे। उन्होंने रामकृष्ण मिशन में शामिल होने की इच्छा जताई, लेकिन वहां विश्वविद्यालय की डिग्री की आवश्यकता बताई गई। इसके बाद वे सिलीगुड़ी और गुवाहाटी होते हुए अल्मोड़ा के अद्वैत आश्रम पहुंचे। वहां भी उन्हें पढ़ाई पूरी करने की सलाह दी गई। उन्होंने गरुड़ छट्टी की गुफाओं में ध्यान किया और कड़ाके की ठंड में समय बिताया। एक तूफान के दौरान उन्होंने बचाव कार्य में भी हिस्सा लिया।

देश के अलग-अलग हिस्सों की यात्रा

1969 में उन्होंने उत्तर प्रदेश, बिहार, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और राजस्थान की यात्रा की। इस दौरान उन्होंने अलग-अलग इलाकों की संस्कृति और जीवन को करीब से देखा। नदियों को मां मानने की परंपरा और अलग-अलग क्षेत्रों के बीच सांस्कृतिक जुड़ाव ने उनका ध्यान खींचा।

उनकी यात्रा राजकोट के रामकृष्ण मिशन पहुंचकर आगे बढ़ी। यहां स्वामी आत्मस्थानंद ने उन्हें कॉलेज की डिग्री हासिल करने और संन्यास लेकर दुनिया से अलग होने के बजाय सेवा के रास्ते पर आगे बढ़ने की सलाह दी।

1971 का बांग्लादेश मुक्ति संग्राम - फोटो : narendramodi.in

संघ से कैसे जुड़े मोदी?

करीब 18 महीने की आध्यात्मिक यात्रा के बाद 1970 में वे वडनगर लौटे। वहां सिर्फ एक दिन रुकने के बाद अहमदाबाद चले गए। अहमदाबाद में उन्होंने गीतामंदिर बस स्टैंड के पास अपने चाचा बाबूभाई की चाय की दुकान पर काम किया। पास ही राष्ट्रीय सेवा संघ (आरएसएस) का डॉ. हेडगेवार भवन था। वहां उनकी पुराने परिचितों और आरएसएस कार्यकर्ताओं से दोबारा मुलाकात हुई। इसके बाद वे संगठन के काम में सक्रिय होते गए। सेवा और कर्मयोग की दिशा में उन्होंने संगठनात्मक जीवन को आगे बढ़ाया।

युवा नरेंद्र मोदी - फोटो : narendramodi.in

आंदोलन और तिहाड़ जेल

1971 में बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के दौरान वे दिल्ली पहुंचे। वहां 10 हजार से ज्यादा जनसंघ कार्यकर्ताओं के साथ गण सत्याग्रह में शामिल हुए। अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में हुए इस आंदोलन में बांग्लादेश को मान्यता देने की मांग की गई थी। नरेंद्र मोदी गिरफ्तार हुए और उन्हें कुछ समय के लिए तिहाड़ जेल भेजा गया।

1972 में उन्होंने आरएसएस से जुड़कर संगठन के लिए काम करने का फैसला किया। प्रचारक के रूप में उनकी दिनचर्या सुबह करीब पांच बजे शुरू होती और देर रात तक संगठन का काम चलता था।

युवा नरेंद्र मोदी - फोटो : narendramodi.in

नवनिर्माण आंदोलन और आपातकाल

1974 में वे गुजरात के नवनिर्माण आंदोलन में सक्रिय हुए। यह युवाओं के बीच भ्रष्टाचार के खिलाफ शुरू हुआ आंदोलन था।1975 में देश में आपातकाल लागू हुआ। नरेंद्र मोदी आपातकाल विरोधी संघर्ष में सक्रिय रहे और गुजरात लोक संघर्ष समिति से जुड़े।

1978 में वे विभाग प्रचारक बने। वडोदरा और मध्य गुजरात का संगठनात्मक काम उनके जिम्मे आया। 1980 में वे संभाग प्रचारक बने। इसके साथ दक्षिण गुजरात और सूरत का क्षेत्र भी उनके कार्यक्षेत्र में शामिल हो गया।

1989 के दौरान लोक शक्ति यात्रा की तस्वीर - फोटो : narendramodi.in

भाजपा से कैसे जुड़े नरेंद्र मोदी?

1987 में नरेंद्र मोदी भाजपा के गुजरात संगठन से जुड़े और संगठन सचिव की जिम्मेदारी संभाली। इसी दौर में लोक शक्ति यात्रा का आयोजन हुआ। अहमदाबाद नगर निगम के चुनाव में भाजपा की पहली जीत के अभियान में भी उनकी संगठनात्मक भूमिका रही।

1989 में लोक शक्ति यात्रा आयोजित हुई। 1990 के गुजरात विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 67 सीटें जीतीं और चिमनभाई पटेल की सरकार में गठबंधन सहयोगी बनी।

1999 की पीएम मोदी और दिवंगत अटल बिहारी वाजपेयी की तस्वीर - फोटो : narendramodi.in

गुजरात से राष्ट्रीय राजनीति तक का सफर

  • 1991 में डॉ. मुरली मनोहर जोशी के नेतृत्व में एकता यात्रा शुरू हुई। नरेंद्र मोदी इस दौरान संगठनात्मक काम में सक्रिय रहे।
  • 1995 के गुजरात विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 121 सीटें जीतकर बहुमत हासिल किया। नरेंद्र मोदी की संगठन सचिव के तौर पर इस चुनाव में भूमिका भी महत्वपूर्ण रही।
  • 1998 में उन्हें भाजपा का राष्ट्रीय महासचिव संगठन बनाया गया। अब उनकी संगठनात्मक जिम्मेदारी गुजरात से निकलकर राष्ट्रीय स्तर पर पहुंच गई।
  • 1999 के लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी उस समय राष्ट्रीय महासचिव संगठन के तौर पर चुनावी अभियान में सक्रिय थे।

2001 में गुजरात के सीएम की शपथ लेते हुए मोदी - फोटो : narendramodi.in

7 अक्तूबर 2001: गुजरात के मुख्यमंत्री की ली शपथ 

फिर 7 अक्तूबर 2001 को नरेंद्र मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। संगठन में करीब तीन दशक तक अलग-अलग जिम्मेदारियां संभालने के बाद अब उनके सामने सीधे राज्य सरकार चलाने की जिम्मेदारी थी।

उनके मुख्यमंत्री बनने के समय गुजरात जनवरी 2001 के भुज भूकंप से हुए नुकसान और पुनर्वास की चुनौती से गुजर रहा था। गुजरात राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण यानी जीएसडीएमए के जरिए प्रभावित लोगों के पुनर्वास के लिए मालिक-आधारित पुनर्वास मॉडल लागू किया गया। इस पुनर्वास व्यवस्था का अनुभव बाद में देश के आपदा प्रबंधन ढांचे में भी इस्तेमाल हुआ और 2005 के आपदा प्रबंधन अधिनियम के संदर्भ में इसे जोड़ा गया।
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