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गंगा में कोरोना संक्रमितों के शव: क्या इस पानी से नहाने वालों को भी हो जायेगा संक्रमण?

Wed, 12 May 2021 03:09 PM IST
Harendra Chaudhary अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

वरिष्ठ वैज्ञानिकों की राय- बहते जल से किसी के संक्रमण की संभावना बहुत कम, लेकिन अन्य गंभीर रोगों के होने की आशंका...
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गंगा में पड़ी लाशें। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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उत्तर प्रदेश और बिहार में गंगा नदी में कोरोना संक्रमितों के शव मिलने की बात सामने आने से हड़कंप मच गया है। लोगों को इस बात का डर सता रहा है कि अगर वे इस पानी में नहाते हैं, या इसे पीते हैं तो इस जल के सेवन से उन्हें भी कोरोना हो सकता है। गंगा किनारे रहने वाले लोग इसी जल को जानवरों को भी पिलाते हैं। ऐसे में इस बात की भी आशंका जताई जा रही है कि इस पानी के सेवन से पशुओं में भी कोरोना महामारी का खतरा कहर बनकर टूट सकता है। लेकिन देश के प्रसिद्ध वैज्ञानिकों और डॉक्टरों ने इस आशंका को पूरी तरह सही नहीं बताया है।

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आईसीएमआर के पूर्व वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉक्टर एनके गांगुली ने अमर उजाला से कहा कि कोरोना शव गंगा में फेंकने से नदी का पानी कोरोना वायरस से संक्रमित हो सकता है। बांग्लादेश में हुए एक अध्ययन में यह बात सामने आई है कि जल में भी कोरोना का वायरस जिंदा रह सकता है। हालांकि, अभी इस बात के पुष्ट प्रमाण नहीं हैं कि जल में पाए गये कोरोना वायरस से किसी व्यक्ति को संक्रमण हो सकता है, या नहीं।

कोरोना मरीजों के मल-मूत्र के जरिये सीवर के पानी में भी कोरोना वायरस के होने के प्रमाण मिले हैं, लेकिन अभी तक ऐसा कोई प्रमाण नहीं मिला है जिसके आधार पर यह कहा जा सके कि यह किसी स्वस्थ व्यक्ति को कोरोना संक्रमित कर सकता है। इस आधार पर अभी यह तो कहा जा सकता है कि कोरोना शव को जल में फेंकने से नदी के जल में कोरोना वायरस पहुंच सकता है और यह उसमें जिंदा रह सकता है। लेकिन यह किसी को संक्रमित कर सकता है या नहीं, अभी इस पर कोई अंतिम राय नहीं दी जा सकती। किसी अध्ययन में अभी इस बात के प्रमाण नहीं मिले हैं।
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अन्य बीमारी होने की आशंका ज्यादा

ऑल इंडिया इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेस (AIIMS) के पूर्व निदेशक डॉ. एमसी मिश्रा ने कहा कि कोरोना वायरस लोगों के श्वसन तंत्र के जरिये सांस या ड्रापलेट्स के माध्यम से उन्हें संक्रमित करता है। ऐसे में गंगा नदी के जल से किसी के संक्रमित होने की संभावना बहुत कम है। इतना ही नहीं, अगर इस जल के सेवन के जरिये कोरोना वायरस किसी व्यक्ति की पेट या आंत में पहुंचता है तो भी इस बात की संभावना ज्यादा है कि वह पेट के अंदर उत्पन्न होने वाले भोजन पाचक रसायनों के कारण नष्ट हो जाए।

अगर रुके हुए पानी में शव के कारण कोई वायरस पहुंच जाता है तो इसके जरिये संक्रमण की संभावना ज्यादा हो सकती है, लेकिन गंगा के बहते हुए पानी में इसका डायलूशन (कम गाढ़ा होना) हो जाता है, और इसलिए यहां भी वायरस की आक्रामकता कम हो सकती है।  अत: इस बात की संभावना बहुत कम ही है कि गंगा के बहते जल के जरिये कोई व्यक्ति कोरोना संक्रमित हो सकता है।  

लेकिन इस तरह शवों के पानी में सड़ने से उनमें कई अन्य खतरनाक बैक्टीरिया पैदा हो जाते हैं जो कई अन्य गंभीर बीमारियों का कारण बन सकते हैं। ऐसे में सलाह यही है कि इस तरह के संक्रमित जल से दूरी बनाकर रखी जाए।
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