सरकार ने इस बारे में एक एंपावर्ड ग्रुप बनाया है। जिन जिलों में25,000 से अधिक प्रवासी श्रमिक पहुंचे हैं उन पर हमारा अधिक ध्यान है। छह प्रदेशों के 116 जिले चिह्नित किए गए हैं। इनमें 31 यूपी और 32 जिले बिहार के हैं, 24 मध्य प्रदेश और 22 राजस्थान व चार-चार जिले प. बंगाल और ओडिशा के हैं। उन्हें 25 प्रकार के कामों का हमारे मंत्रालय की ही जिम्मेदारी है।
हम राज्य सरकारों से तालमेल कर तैयारी पूरी कर चुके हैं। मुख्यमंत्रियों से लेकर सचिवों तक से संपर्क हो चुका है। नोडल अफसर नियुक्त हो चुके हैं। प्रशिक्षक और प्रशिक्षु चिह्नित किए जा चुके हैं। जैसे ही कोरोना का प्रकोप कम होगा, कार्यशालाएं शुरू हो जाएंगी। जैसे-जैसे गृहमंत्रालय अनुमति देगा हमारा काम बढ़ता जाएगा।
यह महात्मा गांधी की ग्राम स्वराज योजना और प्रधानमंत्री मोदी की आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना को मूर्त रूप देगा। इससे पलायन रुकेगा। ग्रामीण अर्थव्यवस्था सशक्त बनेगी। कोरोना के दौरान भी जब शहरों के मॉल बंद थे तो सारा सामान गांव की तर्ज पर चल रही एकल दुकानों ने ही उपलब्ध कराया।
वहां एक बड़ी पहल हुई है -गांव की ओर चलो। पीएम व गृहमंत्री की पहल पर चीफ सेक्रेटरी स्तर तक के अधिकारियों ने गांवों में रात्रि निवास किया और वहां की समस्याएं समझी। वर्षों से सड़कें, नाले, पुल जैसी मूलभूत चीजें भी उपलब्ध नहीं थीं। अब वहां विकास के कार्य प्रारंभ हो चुके हैं। आतंकियों के पैर उखड़ चुके हैं। पंचायत चुनाव में लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
उनके प्रश्न इतने नॉन-सीरियस हैं कि मीडिया को भी उनको गंभीरता से नहीं लेना चाहिए।
भारतीय जनता पार्टी ने राममंदिर के निर्माण को कभी राजनीतिक विषय नहीं बनाया। यह हमारे लिए सांस्कृतिक विषय है। श्रद्धा और आस्था का मामला है। चुनाव तो मोदी सरकार के विकास कार्यों के आधार पर ही होगा।