अस्थिर भू-राजनीतिक माहौल के भी होगा अभ्यास
नौसैनिक अभ्यास से पहले वाइस एडमिरल सोबती ने कोटा हाउस में मीडिया से बातचीत की। इस दौरान उन्होंने कहा कि इस अभ्यास में 51 नौसेनाओं के भाग लेने की योजना है। इस दौरान मौजूदा भू-राजनीतिक स्थिति और उनसे पैदा हो रही समुद्री चुनौतियों पर भी चर्चा की जाएगी। यह अभ्यास लाल सागर में बढ़ती सुरक्षा चिंताओं सहित अस्थिर भू-राजनीतिक माहौल के बीच होगा।
51 देशों की नौसेनाएं अभ्यास में भाग लेंगी
वाइस एडमिरल सोबती ने कहा कि मिलन भारतीय नौसेना का समुद्री गतिविधि में साझेदारी करने के लिए दुनियाभर के मित्र देशों को एक साथ लाने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है। उन्होंने कहा, इस साल हम विशाखापत्तनम में मिलन कर रहे हैं और 51 देश इस आयोजन में भाग ले रहे हैं। इनमें 15 देश अपने जहाज भेज रहे हैं। एक विमान भी अभ्यास में शामिल हो रहा है। उन्होंने बताया कि इसमें एक अंतरराष्ट्रीय समुद्री प्रदर्शनी, एक समुद्री प्रदर्शनी और एक सिटी परेड की योजना है। इसके अलावा, जूनियर अधिकारियों की बातचीत सहित कई कार्यक्रम हैं।
पहली बार अभ्यास में हिस्सा लेंगी इन देशों की नौसेनाएं
उन्होंने आगे बताया कि यह सब मिलन के बंदरगाह चरण का हिस्सा है, जो 19 से 23 फरवरी तक चलेगा। वाइस एडमिरल सोबती ने बताया कि इसके बाद समुद्री चरण होगा, जो 24 से 27 फरवरी तक चलेगा। जिसमें भारतीय नौसेना के जहाज, विमान और मित्र देशों के जहाज भाग लेंगे। अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस, बांग्लादेश, ब्राजील, दक्षिण कोरिया, वियतनाम, इंडोनेशिया और मलेशिया की नौसेनाएं भाग लेने वालों में शामिल हैं। इसके अलावा कनाडा, जर्मनी, इराक, इटली, स्पेन और यमन और अन्य देश पहली बार अभ्यास का हिस्सा होंगे।
'चीन के खिलाफ कोई संदेश नहीं'
एक पत्रकार ने जब सवाल किया कि क्या इस महा अभ्यास से चीन को संदेश दिया जाएगा तो वाइस एडमिरल सोबती ने कहा, इसमें 51 देश भागीदारी कर रहे हैं और इन देशों में से हर एक के चीन के साथ अपने अलग रिश्ते हैं। मैं यह साफ करना चाहता हूं कि चीन के खिलाफ यहां कोई संदेश नहीं है। उन्होंने कहा, हमारा संदेश यह है कि अगर हम साथ मिलकर काम करें तो हम समुद्र में हर चुनौतियों का सामना कर सकते हैं।