ओडिशा ग्रामीण आवास विकास निगम (ओआरएचडीसी) ऋण घोटाले में एक विशेष सतर्कता अदालत ने सोमवार को पूर्व आईएएस अधिकारी विनोद कुमार और चार अन्य को दोषी ठहराया और उन्हें तीन साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई। सतर्कता विभाग ने एक बयान में कहा कि भ्रष्टाचार के मामलों में ओआरएचडीसी के पूर्व प्रबंध निदेशक विनोद कुमार की यह लगातार सातवीं सजा है।
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विशेष सतर्कता न्यायाधीश, भुवनेश्वर की अदालत ने पांचों को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 13(2) r/w 13(1)(d) और आईपीसी की धारा 468/120-बी के तहत दोषी ठहराया है। कोर्ट ने दोषियों पर 50-50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। विनोद कुमार के अलावा, दोषी ठहराए गए अन्य लोगों में ओआरएचडीसी के पूर्व कंपनी सचिव स्वस्ति रंजन महापात्रा, पूर्व ऋण वसूली सहायक उमेश चंद्र स्वैन, और रश्मी पटनायक और रतन कुमार साहू, दोनों होम लाइव्स हाउसिंग, भुवनेश्वर के भागीदार हैं।
सतर्कता विभाग ने ओआरएचडीसी के पूर्व अधिकारियों पर रश्मि पटनायक और रतन कुमार साहू को आपराधिक साजिश के तहत बिना उचित दस्तावेज, जांच एवं सुरक्षा के 50 लाख रुपये के कर्ज की मंजूरी और संवितरण के आरोप लगाए थे।