मंगलवार को शीर्ष अदालत में एक वकील ने मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ के समक्ष किसी अन्य न्यायाधीश की शिकायत की। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि शीर्ष अदालत में मौजूद सभी न्यायाधीश बहुत अनुभवी हैं। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट में न्यायमूर्ति बीआर गवई की अध्यक्षता में एक पीठ ने वकील अशोक पांडे की दलीलों को खारिज किया था। इसके बाद आशोक पांडे मुख्य न्यायाधीश की अदालत में पेश हुए और दावा किया कि उन्हें न्यायमूर्ति बीआर गवई ने वकालत का लाइसेंस रद्द करने की धमकी दी। मुख्य न्यायाधीश इस दावे पर असहमति जताते हुए कहा,‘अगर आप अदालत के फैसले से संतुष्ट नहीं है, तो आप समीक्षा याचिका दायर कर सकते हैं। वकालत के साथ साथ सुप्रीम कोर्ट के सभी न्यायाधीशों के पास दशकों का अनुभव है।’
मुख्य न्यायाधीश ने वकील को लगाई फटकार
उधर वकील अशोक पांडे ने कहा, ‘मैं केवल जुर्माना लगाने वाले आदेश को वापस लेने के लिए कह रहा था। इसके बाद न्यायाधीश ने मुझे अदालत से बाहर निकलने को कहा। उन्होंने मुझे मेरा लाइसेंस रद्द करने की भी धमकी दी। न्यायाधीशों की पीठ में न्यायमूर्ति जेबी पादरीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा भी शामिल थे।’ वकील की दलीलों पर मुख्य न्यायाधीश ने भी उत्तेजित होते हुए कहा,’मैं काफी लंबे समय से आपकी दलीलें सुन रहा हूं और अब मैं अपना धैर्य खो रहा हूं। मैं दूसरी अदालतों में होने वाले कामकाजों से अच्छी तरह वाकिफ हूं। आप कृपया कर कानून के हिसाब से इसका हल ढूंढिए।’
‘दो सप्ताह के भीतर जुर्माना राशि जमा कराएं’
मुख्य न्यायाधीश ने वकील को समझाने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि कभी कभी अदालतों में मामले इस हद तक बढ़ जाते हैं कि वकीलों और न्यायाधीशों के बीच तीखी बहस शुरू जाती है। लेकिन, शीर्ष अदालत के न्यायाधीश ऐसी स्थितियों को अच्छी तरह से संभाल लेते हैं। इससे पहले न्यायमूर्ति अभय एस ओका की पीठ ने अशोक पांडे पर इल्जाम लगाया कि उन्होंने आधारहीन याचिका दाखिल की थी। अशोक पांडे पर इसके लिए 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया था। इसके साथ ही पांडे को निर्देश दिए गए थे कि दो सप्ताह के भीतर इस राशि को जमा कराएं। अशोक पांडे ने जुर्माने का भुगतान करने के लिए अदालत से कुछ और समय मांगा था।