यूरोपीय संसद के चुनाव में दक्षिणपंथी पार्टियों के प्रभाव को साफ तौर पर देखा जा रहा है। फ्रांस की नेशनल रैली, इटली की ब्रदर्स ऑफ इटली और ऑस्ट्रिया की फ्रीडम पार्टी की सीटों में अच्छा खासा इजाफा होने का अनुमान है।
यूरोपीय संसद के मतदान का आज आखिरी दिन है। यूरोप में राजनीतिक ध्रुवीकरण और राष्ट्रवाद की लहर देखी जा रही है। ऐसे हालात में यूरोपीय संसद का यह चुनाव बेहद अहम माना जा रहा है। मतदान के दौरान हिंसक घटनाएं भी हुईं और एक हमले में डेनमार्क के प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन भी चोटिल हुए।
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यूरोपीय चुनाव में दक्षिणपंथी पार्टियों का बढ़ा प्रभाव
यूरोपीय संसद के चुनाव में दक्षिणपंथी पार्टियों के प्रभाव को साफ तौर पर देखा जा रहा है। फ्रांस की नेशनल रैली, इटली की ब्रदर्स ऑफ इटली और ऑस्ट्रिया की फ्रीडम पार्टी की सीटों में अच्छा खासा इजाफा होने का अनुमान है। बेल्जियम की अलगाववादी और आव्रजन विरोधी पार्टी व्लाम्स बेलांग भी आगे चल रही है। यूरोपीय संसद के मतदान की प्रक्रिया गुरुवार से शुरू हुई थी और मतदान के बाद रविवार शाम से आने शुरू हो जाएंगे।
दुनिया के लिए अहम हैं यूरोपीय संसद के चुनाव
27 सदस्य देशों वाली यूरोपीय संसद के लिए 10वीं बार चुनाव हो रहे हैं। पहले यूरोपीय संसद के पास सिर्फ सुझाव देने का ही अधिकार था, लेकिन अब इसकी शक्तियां बढ़ गई हैं और अब यूरोपीय संसद सदस्य देशों की सरकारों के साथ मिलकर कानून भी बना सकती है। यही वजह है कि पूरी दुनिया के लिहाज से यूरोपीय संसद के चुनाव बेहद अहम हो जाते हैं। यूरोपीय संसद में एक सदस्य देश के सांसदों की संख्या कितनी होगी, ये उस देश की जनसंख्या पर निर्भर करता है। साल 2019 में यूरोपीय संसद के लिए 751 सांसद चुने गए थे, लेकिन साल 2020 में ब्रिटेन के यूरोपीय संघ से बाहर निकलने के बाद यूरोपीय संसद के सदस्यों की संख्या घटकर 705 रह गई है।
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यूरोपीय संसद के चुनाव में 18 साल से कम उम्र के लोगों को भी वोट देने का अधिकार होता है। कई यूरोपीय देशों में वोट देने की न्यूनतम उम्र 16 साल है तो कई देशों में यह 17 साल है। यूरोपीय संसद के चुनाव में यूक्रेन युद्ध सबसे बड़ा मुद्दा है और यूरोपीय देशों की सुरक्षा को लेकर चिंता उभरी है। इसके अलावा यूरोप की अर्थव्यवस्था, नौकरियों, गरीबी और सार्वजनिक स्वास्थ्य, जलवायु परिवर्तन जैसे मुद्दे भी प्रमुख रहे।
बेल्जियम में आव्रजन विरोधी पार्टी व्लाम्स बेलांग को युवाओं का भरपूर समर्थन मिल रहा है। नीदरलैंड में लेफ्ट ग्रीन पार्टी बढ़त बनाए हुए हैं, लेकिन इस्लाम विरोधी पॉपुलिस्ट पार्टी को भी अच्छा समर्थन मिल रहा है। यूरोपीय देशों के लोग अब राष्ट्रीय मुद्दों को लेकर मुखर हैं और यूरोपीय राजनीति के मुद्दों में उनकी खास रुचि नहीं है। फ्रांस में नेशनल रैली पार्टी के नेता मरीन ले पेन को ज्यादा सीटें जीतने की उम्मीद है। हंगरी में विक्टर ओर्बन को काफी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है और वहां भी दक्षिणपंथी पार्टी सिजा पार्टी का प्रभाव बढ़ रहा है।