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Mohan Bhagwat: 'हिंदू धर्म का सार सबको गले लगाना, न कि आपस में लड़ाई करना..', आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत का बयान

Mon, 28 Jul 2025 10:39 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोच्चि।

सार

Mohan Bhagwat: 'हिंदू धर्म का सार सबको गले लगाना, न कि आपस में लड़ाई करना..', आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत का बयान
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आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत। - फोटो : पीटीआई
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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत ने सोमवार को कहा कि कट्टर हिंदू होने का मतलब किसी और का विरोध करना नहीं होता है। उन्होंने कहा कि हिंदुत्व का असली सार सबको अपनाने में है, न कि किसी से लड़ाई में। भागवत कोच्चि में 'ज्ञान सभा' नाम के एक राष्ट्रीय शिक्षा सम्मेलन में बोल रहे थे। इसे आरएसएस से जुड़े संगठन 'शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास' की ओर से आयोजित किया गया था। उन्होंने यह भी कहा कि अक्सर लोग गलत समझते हैं कि जो सच्चा हिंदू होता है वो दूसरों को बुरा कहता है, लेकिन यह सच नहीं है।

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भागवत ने कहा, सच्चा हिंदू होने का मतलब किसी का विरोध करना नहीं है और न ही यह कहना है कि हम हिंदू नहीं हैं। हम हिंदू हैं, लेकिन हिंदुत्व का असली मतलब सबको अपनाना है। उन्होंने कहा कि जो लोग हिंदुओं को एकजुट करना चाहते हैं, उन्हें इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि हिंदुत्व किसी को बाहर करने की नहीं, बल्कि सबको साथ लेकर चलने की बात करता है।

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भागवत ने कहा कि दुनिया में दो तरह का ज्ञान होता है — विद्या (सच्चा ज्ञान) और अविद्या (अज्ञान)। दोनों ही इंसान की दुनियावी जिंदगी और आध्यात्मिक सफर में जरूरी भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि भारत हमेशा से इन दोनों की अहमियत को समझता रहा है। भारत एक आध्यात्मिक देश है और यहां की राष्ट्रवाद की भावना बहुत पवित्र है।

भागवत ने कहा कि सच्चा विद्वान वो नहीं होता जो बस कमरे में बैठकर सोचता रहे, बल्कि वो होता है जो अपने विचारों को आचरण में लाकर दिखाए, यानी जो कहे वही करे। कार्यक्रम आयोजकों की ओर से जारी विज्ञप्ति के अनुसार, भागवत ने कहा कि अंग्रेजों के समय की शिक्षा प्रणाली आज के भारत के लिए ठीक नहीं है, जिसे मैकॉले ने शुरू किया था।
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उन्होंने कहा कि अगर भारत की शिक्षा प्रणाली सत्य और करुणा पर आधारित हो, तो भारत में इतनी योग्यता और सामर्थ्य है कि वो पूरी दुनिया के कल्याण के लिए काम कर सकता है।

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