बीते सप्ताह सुप्रीम कोर्ट ने बेटियों के हक में एक बड़ा फैसला सुनाया। शीर्ष अदालत ने बेटी को भी पिता की संपत्ति में बराबरी का अधिकार दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि संशोधित हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम के तहत बेटियों को भी बेटों के समान ही हिस्सा मिलेगा।
अदालत ने साफ शब्दों में कहा कि बेटियों का संयुक्त हिंदू परिवार की पैतृक संपत्ति पर उतना ही हक है, जितना कि बेटों का। बेटी जन्म के साथ ही पिता की संपत्ति में बराबर की हकदार हो जाती है। तीन जजों की पीठ ने स्पष्ट किया कि भले ही पिता का निधन हिंदू उत्तराधिकार (संशोधन) कानून, 2005 लागू होने से पहले हो गई हो, फिर भी बेटियों का माता-पिता की संपत्ति पर अधिकार होगा।
इस कानून के आने से क्या बदलाव होंगे? यह कानून कब बना? सुप्रीम कोर्ट ने अपने नए फैसले में क्या-क्या कहा? आइए जानते हैं...