प्रमुख अर्थशास्त्री व सांख्यिकीविद् प्रोनब सेन का कहना है कि कोरोना की पहली लहर व राष्ट्र व्यापी लॉकडाउन के दौरान सरकारी अधिकारियों ने आजीविका गंवाने वाले शहरी व ग्रामीण लोगों को हर माह 5000 से 6000 रुपये न्यूनतम राशि देने पर विचार किया था।
सेन ने एक वेबसाइट से चर्चा में कहा कि हम सच में उस दौरान बेरोजगार हुए लोगों की आर्थिक मदद करने के बारे में विचार कर रहे थे। यह मदद उन लोगों को दी जाना थी, जिन्हें लॉकडाउन के कारण रोजगार छूट जाने से अपने घरों को लौटना पड़ा था। सेन देश के पहले मुख्य सांख्यिकी अधिकारी थे। उन्होंने कहा कि यह न्यूनतम बेसिक आय का प्रस्ताव अस्थाई था।
कुछ सालों से चर्चा में यह प्रस्ताव
बेसिक आय योजना का विचार देश में कुछ समय से चल रहा है। गरीबी उन्मूलन के रूप में इस पर योजनाकार विचार करते रहे हैं। इससे जरूरतमंद लोगों तक सीधे सब्सिडी पहुंचाने में भी मदद सकती है। हालांकि कुछ अर्थशास्त्रियों ने इसे किसानों तक सीमित रखने का विचार दिया तो कुछ ने समूची आबादी के लिए यह योजना प्रस्तावित की थी।
दूसरी लहर में डेढ़ करोड़ नौकरियां गईं
सीएमआईई के आंकड़ों में कहा गया है कि मई 2021 में दूसरी लहर के चरम के दौरान डेढ़ करोड़ से अधिक लोगों की नौकरियां चली गईं। गत वर्ष के लॉकडाउन के बाद दूसरी बार बेरोजगारी दर पिछले महीने दोहरे अंकों में चली गई थी।
इसलिए रोक दी गई थी न्यूनतम आय योजना
प्रोनब सेन ने कहा कि असंगठित क्षेत्र के उन लोगों के डाटा पर्याप्त नहीं होने के कारण ही न्यूनतम आय की योजना को आगे नहीं बढ़ाया गया। नौकरी खोने वाले और निष्क्रिय जन-धन खाते आदि के डाटा से यह तय करना था कि बेरोजगार हुए व्यक्ति से परिवार के कितने सदस्य जुड़े थे। यह सुलभ नहीं हो सके। निष्क्रिय जन-धन खातों के बारे में अंतिम डाटा जनवरी 2020 का है। तब वित्त मंत्रालय ने लोकसभा के जवाब में कहा था कि 20 प्रतिशत से भी कम जनधन खाते निष्क्रिय थे। 6 जून, 2021 तक देश में कुल 42.47 करोड़ जन-धन खाते मौजूद थे। इन खातों को निष्क्रिय तब माना जाता है जब उनमें दो साल तक कोई लेनदेन न हुआ हो।
अमेरिका, कनाडा समेत कई देशों ने दी मदद
वर्ष् 2020 में, दुनिया भर के देशों ने देश के कमजोर व बेरोजगार हुए लोगों को लॉकडाउन से उत्पन्न हालात से निपटने के लिए राशि दी थी। कनाडा ने महामारी के कारण आय गंवाने वालों को प्रति माह 1400 डॉलर दिए। राज्य अमेरिका ने 1200 डॉलर तक दिए तो दक्षिण कोरिया ने 820 डॉलर व जापान ने 931 डॉलर खातों में हस्तांतरित किए थे।
भारत के कई संगठन कर रहे मांग
भारत में तीसरी लहर की आशंकाओं के बीच कई संगठन कमजोर आय वर्ग के लोगों को निश्चित राशि देने की मांग कर रहे हैं। प्रमुख अर्थशास्त्रियों और उद्योग निकायों जैसे कि फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ने सरकार से भारत के गरीबों को न्यूनतम आय सहायता प्रदान करने के लिए कहा है। उनका कहना है कि जनगणना के आंकड़ों व अन्य डाटा को फिर से जुटाते हुए न्यूनतम आय गारंटी योजना लागू की जाना चाहिए। कांग्रेस भी इस तरह की मांग करती रही है।