फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

त्र्यंबकेश्वर मंदिर में महिलाओं को सशर्त प्रवेश की इजाजत

Fri, 15 Apr 2016 09:56 PM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला,मुंबई

सार

  • हर दिन सुबह छह से सात बजे के बीच होगी प्रवेश की अनुमति
  • लेकिन सूती व सिल्क कपड़े पहने होने पर ही जा सकेंगी अंदर
     
विज्ञापन
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

महाराष्ट्र के नासिक स्थित त्र्यंबकेश्वर देवस्थान ट्रस्ट ने भी महिलाओं को भगवान शिव के प्रख्यात मंदिर के गर्भगृह में सशर्त प्रवेश की अनुमति दे दी है। महिलाओं को हर दिन एक घंटे त्र्यंबकेश्वर मंदिर में प्रवेश की अनुमति रहेगी, लेकिन शर्त यह है कि गर्भगृह में पूजा अर्चना के लिए महिलाओं को सूती या सिल्क के कपड़े पहनने होंगे। ट्रस्ट की इस शर्त को लेकर विवाद शुरू हो गया है।
विज्ञापन


पुणे की स्वराज महिला संगठन की महिला कार्यकर्ताओं ने इस शर्त को मानने से इंकार करते हुए पुलिस में ट्रस्ट के सदस्यों, मंदिर के पुजारी और गांव वालों सहित 250 लोगों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। संगठन की अध्यक्ष वनिता गुट्टी का आरोप है कि इन लोगों ने उन्हें मंदिर में प्रवेश नहीं करने दिया। मंदिर की एक ट्रस्टी ललिता शिंदे ने कहा है कि ट्रस्ट ने सुबह छह बजे से सात बजे तक महिलाओं को मंदिर के गर्भगृह में सशर्त प्रवेश की अनुमति देने का निर्णय लिया है। यह फैसला पुणे के स्वराज संगठन के आंदोलन के बाद किया गया।

स्वराज्य संगठन की अध्यक्ष वनिता गुट्टे करीब 25 महिलाओं के साथ बृहस्पतिवार को मंदिर में दर्शन के लिए आई थीं, लेकिन उन्होंने गीले सूती या सिल्क के कपड़े पहनकर मंदिर के गर्भ गृह में प्रवेश करने की शर्त को मानने से इंकार कर दिया। शिंदे ने कहा कि उसी दौरान पूजा करने के लिए ‘सोवाला’ (सिल्क के कपड़े) पहने हुए कई पुजारियों ने गर्भगृह में प्रवेश किया। मंदिर प्राधिकारियों और कार्यकर्ताओं के बीच बहस के चलते सुबह छह से सात बजे तक महिलाओं के प्रवेश की समय सीमा समाप्त हो गई।
विज्ञापन


उधर, मंदिर के ट्रस्टियों का कहना है कि भगवान शिव की पूजा अर्चना के बहाने संगठन की महिलाएं मीडिया में अपनी छवि चमकाने की कोशिश कर रही हैं। त्र्यंबकेश्वर मंदिर के एक पुजारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि वनिता गुट्टी अपने साथ बाउंसर और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया को साथ लेकर आई थी। वह भगवान को बदनाम कर अपना नाम करने के लिए इस तरह का हथकंडा अपना रही हैं, इसलिए उन्हें मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश नहीं करने दिया गया। मंदिर के गर्भगृह में महिलाओं के प्रवेश को लेकर हाईकोर्ट में अपील की गई है। आगामी 18 अप्रैल को इस पर सुनवाई होनी है।
विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें