कोलार-चिक्काबल्लापुर जिला सहकारी दुग्ध उत्पादक संघ लिमिटेड के एक भर्ती घोटाले का खुलासा हुआ है। प्रवर्तन निदेशालय ने कर्नाटक कांग्रेस विधायक केवाई नानजेगौड़ा में नौकरियों की बिक्री पर सीधे तौर पर शामिल होने का आरोप लगाए हैं। ईडी ने अपने बयान में कहा कि कर्नाटक विधायक के वाई नानजेगौड़ा की अध्यक्षता वाली एक समिति ने इंटरव्यू प्रक्रिया में पूरी तरह से हेरफेर करके और रिश्वत लेकर 30 उम्मीदावरों को डेयरी सहकारी में नौकरी दी है। गौरतलब है कि ईडी ने आठ जनवरी को कोलार-चिक्काबल्लापुर जिला सहकारी दुग्ध उत्पादक संघ लिमिटेड (कोलुम) के लिए कर्मचारियों की भर्ती में अनियमितताओं और अवैध आवंटन की मनी लॉन्ड्रिंग जांच के तहत छापेमारी की थी।
ईडी ने दावा किया कि कांग्रेस विधायक नानजेगौड़ा और चार अन्य सदस्यों की अध्यक्षता वाली डेयरी सहकारी समिति ने भर्ती प्रक्रिया में पूरी तरह से हेरफेर की थी। एजेंसी ने कहा कि बोर्ड के फैसले के मुताबिक, चयनित उम्मीदवारों को आदेश जारी किए गए और अंतिम परिणाम सार्वजनिक किए बिना उन्हें प्रशिक्षण के लिए भेज दिया गया। ईडी ने दावा किया कि भर्ती प्रक्रिया में सीटें 20 से 30 लाख रुपये प्रति सीट के हिसाब से बेची गई। ईडी ने कांग्रेस विधायक केवाई नानजेगौड़ा के हेराफेरी में सीधे तौर पर शामिल होने का आरोप लगाया है। गौरतलब है कि कोलार-चिक्काबल्लापुर जिला सहकारी दुग्ध उत्पादक संघ लिमिटेड कर्नाटक का दूसरा सबसे अधिक दूध उत्पादक जिला संगठन हैं।
कांग्रेस विधायक केवाई नानजेगौड़ा ने समिति के अन्य सदस्यों और राजस्व अधिकारियों के साथ मिलीभगत से एक ही महीने में चार बैठकों के तहत लगभग 150 करोड़ रुपये की लगभग 80 एकड़ भूमि कई लोगों को देकर अपनी शक्ति का दुरुपयोग किया है। एजेंसी ने आरोप लगाया कि कई फर्जी दस्तावेज बनाकर कई लोगों को लाभ पहुंचाया गया है।