नोटबंदी के बाद कालेधन को सफेद करने में बैंक अधिकारियों को मिलीभगत का एक और मामला सामने आया है। प्रवर्तन निदेशालय ने मुंबई के चार बैंकों से कहा कि उनके अधिकारियों ने झावेरी बाजार के एक सर्राफा कारोबारी की करीब 150 करोड़ की रकम को अवैध तरीके से सफेद किया है।
टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक प्रवर्तन निदेशालय ने बताया कि बैंक अधिकारियों ने आंख मूंद कर शेल कंपनियों (वे कंपनियां जो केवल कागज पर ही बनी हैं) के खातों में रकम जमा कराई। उस रकम को हवाला कारोबारी और बुलियन ट्रेडर्स के जरिए सफेद किया गया।
प्रवर्तन निदेशालय के मुताबिक अवैध तरीके से जमा कराए गए नोटों की गिनती तक नहीं हुई। बैंक अधिकारियों ने नोटों की गिनती किए बिना डिपॉजिट रिसीप्ट भी जारी कर दी। बाद में पैसे कम या नकली नोट निकलने पर खातों से पैसे घटाकर करेक्शन कर दिया गया।
ईडी के मुताबिक कई ऐसे मामले सामने आए जब खातों में बड़ी रकम जमा की गई, लेकिन एक दिन बाद ही हजारों रुपये निकाल लिए गए।
उधर आरोपी कारोबारी ग्राहकों से पैसे मिलने का दावा कर रहे हैं, लेकिव वे सबूत दे पाने में नाकाम रहे। प्रवर्तन निदेशालय ने आरोपियों के खाते फ्रीज कर दिए हैं। जब तक आरोपियों पर कार्रवाई होती, उन्होंने ज्यादातर रकम ठिकाने लगा दी। कुलमिलाकर 8 करोड़ ही रुपये ही फ्रीज किए जा सके।