केंद्र सरकार ने कहा है कि ऐसे कर्मचारियों को बर्खास्त किया जाएगा जिन्होंने फर्जी अनुसूचित या पिछड़ी जाति प्रमाणपत्र बनवाकर नौकरी पाई है।
सभी केंद्रीय सरकारी विभागों से कहा गया है कि उनके अंतर्गत आने वाले विभिन्न संगठनों में हुई ऐसी नियुक्तियों की जानकारी इकट्ठा करें। इस कदम को उन 1800 नियुक्तियों के संदर्भ में देखा जा रहा है। इन लोगों ने कथित तौर पर फर्जी जाति प्रमाणपत्र के द्वारा नौकरी पाई है।
एक आधिकारिक आंकड़े में यह तथ्य सामने आया। इनमें अधिकतर नौकरियां सार्वजनिक बैंकों, इंश्योरेंस कंपनियों जैसे वित्तीय क्षेत्र में हासिल की गई हैं।
मौजूदा नियमों के अनुसार, यदि पाया जाता है कि किसी सरकारी कर्मचारी ने नियुक्ति लेने के लिए झूठी जानकारी दी है या झूठे दस्तावेज उपलब्ध करवाएं हैं तो उसे नौकरी से हटा दिया जाता है। लोकसभा में 29 मार्च को लिखित जवाब देते हुए कार्मिक राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा था कि फर्जी जाति प्रमाणपत्र के आधार पर 1,832 नियुक्तियां की गई हैं।
इन नियुक्तियों में से 276 को निलंबित किया जा चुका है या निकाल दिया गया है, 521 के खिलाफ मुकदमा चल रहा है और बचे हुए 1035 मामलों में अनुशासनात्मक कार्रवाई किया जाना बाकी है।
फर्जी प्रमाणपत्र के माध्यम से नौकरी पाने वाले 1296 मामले वित्तीय विभाग के अंतर्गत हैं। इनमें 157 मामले स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, 135 मामले सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, 112 मामले इंडियन ओवरसीज बैंक, 103 सिंडिकेट बैंक और 41 अन्य न्यू इंडिया एश्योरेंस और यूनाइटेड इंडिया एश्योरेंस से संबंधित हैं।