प्रतिष्ठित उड़िया साहित्यकार रजत कुमार कर का रविवार को भुवनेश्वर के एक निजी अस्पताल में निधन हो गया। उनके परिजनों ने बताया वह 88 वर्ष के थे और उन्हें हृदय संबंधी बीमारियां थीं। रजत कुमार कर को साहित्य और शिक्षा के लिए 2021 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया था।
उन्होंने बताया कि दोपहर तक वे ठीक थे। दोपहर में वे खाना खाकर आराम करने चले गए। रजत कुमार को शाम करीब पांच बजे सीने में दर्द की शिकायत हुई थी। इसके बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया। जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
वह छह दशकों तक टीवी और रेडियो पर वार्षिक रथ यात्रा के दौरान अपनी टिप्पणी के लिए जाने जाते थे। जगन्नाथ संस्कृति के वे कुशल वक्ता थे। उन्होंने पाला की ओडिशा की मरणासन्न कला के पुनरुद्धार में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
वह उपेंद्र भांजा साहित्य पर एक विपुल लेखक थे। उन्होंने सात गैर-कथाएं भी लिखीं हैं। उन्होंने भगवान जगन्नाथ पर कुछ पुस्तकें भी लिखी हैं।
प्रधानमंत्री ने निधन पर शोक किया व्यक्त
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को प्रख्यात ओड़िया साहित्यकार रजत कुमार कर के निधन पर शोक व्यक्त किया और उन्होंने कहा कि वह सांस्कृतिक जगत के महानायक थे।
पीएम मोदी ने एक ट्वीट में कहा कि डॉ. रजत कुमार कर सांस्कृतिक जगत के महानायक थे। उनके बहुमुखी व्यक्तित्व को उस तरह से देखा जाता था, जिसमें उन्होंने रथ यात्रा का वर्णन किया, विविध विषयों पर लिखा और पाल कला को पुनर्जीवित करने के लिए काम किया।
उन्होंने कहा कि उनके निधन से दुखी हूं। उनके परिवार और प्रशंसकों के प्रति संवेदना। ओम शांति।