जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (जेएनयू) के छात्र उमर खालिद ने राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को बताया है कि एल्गार परिषद कार्यक्रम में मेरे भाषण के लिए किसी ने मुझे कोई स्क्रिप्ट नहीं दी थी। इस कार्यक्रम के बाद कथित तौर पर महाराष्ट्र के पुणे में भीमा-कोरेगांव में हिंसा भड़क गई थी।
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21 दिसंबर 2017 को पुणे के शनिवारवाड़ा में भीमा-कोरेहांव के युद्ध की 200वीं सालगिरह के अवसर पर कार्यक्रम आयोजित हुआ था। इसमें उमर खालिद भी शामिल हुए थे।
इस मामले में खालिद के खिलाफ पुणे के एक निवासी ने शिकायद दर्ज कराई थी। उसने दावा किया था कि जेएनयू छात्र ने कार्यक्रम में भड़काऊ भाषण दिया था और उसके बयान अशांति फैलाने और समुदायों के बीच संघर्ष की स्थिति बनाने पर केंद्रित थे। इसी के चलते एक जनवरी 2018 को भीमा-कोरेगांव में हिंसा हुई थी।
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खालिद के खिलाफ कथित तौर पर भड़काई भाषण देने के लिए एफआईआर दर्ज की गई थी। लेकिन, उसे एल्गार परिषद माओवादी संबंध मामले में कभी आरोपी नहीं बनाया गया। इस मामले की जांच भी एनआईए कर रही है।
एनआईए को दिए अपने बयान में खालिद ने कहा है कि मुझे इस कार्यक्रम में सेवानिवृत्त न्यायाघीश बीजी कोलसे-पाटिल ने आमंत्रित किया था। वह कार्यक्रम के आयोजकों में से एक थे।