भीमा-कोरेगाव मामले के आरोपी सामाजिक कार्यकर्ता गौतम नवलखा ने आज एनआईए (राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। वहीं, एल्गार परिषद-माओवादी संबंध मामले में सामाजिक कार्यकर्ता आनंद तेलतुंबडे भी आत्मसमर्पण के लिए आज मुंबई स्थित एनआईए कार्यालय पहुंचे। सुप्रीम कोर्ट ने कोरोना वायरस महामारी के चलते नवलखा की दलील पर आगे सुनवाई करने से इनकार कर दिया था।
इस साल 17 मार्च को उच्चतम न्यायालय ने आनंद तेलतुंबडे और सह-अभियुक्त और नागरिक अधिकार कार्यकर्ता गौतम नवलखा की गिरफ्तारी की अग्रिम जमानत याचिका खारिज करते हुए उन्हें जांच एजेंसी के सामने आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया था।
माओवादियों से संबंध के आरोप में तेलतुंबडे और कई अन्य नागरिक अधिकार कार्यकर्ताओं के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) के तहत मामले दर्ज किए गए हैं। इन कार्यकर्ताओं को शुरूआत में कोरेगांव-भीमा में भड़की हिंसा के बाद पुणे पुलिस ने गिरफ्तार किया था।
पुलिस के अनुसार इन लोगों ने 31 दिसंबर, 2017 को पुणे में आयोजित एल्गार परिषद की बैठक में भड़काऊ भाषण और बयान दिए थे जिसके अगले दिन हिंसा भड़क गई थी। पुलिस ने कहा कि वे प्रतिबंधित माओवादी समूहों के सक्रिय सदस्य हैं। इसके बाद यह मामला एनआईए को सौंप दिया गया था।
बॉम्बे उच्च न्यायालय ने अग्रिम जमानत याचिकाओं की सुनवाई करते हुए तेलतुंबडे और सह-आरोपी गौतम नवलखा को गिरफ्तारी से अंतरिम सुरक्षा प्रदान की थी। उच्च न्यायालय द्वारा उनकी याचिकाओं को खारिज किए जाने के बाद इन दोनों ने उच्चतम न्यायालय का रुख किया था।
17 मार्च, 2020 को शीर्ष अदालत ने इनकी याचिकाओं को खारिज कर दिया था और तीन सप्ताह के भीतर उन्हें आत्मसमर्पण करने को कहा था। उच्चतम न्यायालय ने नौ अप्रैल को इन दोनों को आत्मसमर्पण करने के लिए एक और सप्ताह का समय दिया था।