भारत में वाहनों की बिक्री में दोपहिया और तिपहिया वाहनों की हिस्सेदारी 80 फीसदी से अधिक है। पिछले कुछ वर्षों में इलेक्ट्रिक वाहनों को तेजी से अपनाया जा रहा है। इलेक्ट्रिक दोपहिया और तिपहिया वाहन बनाने वाली लगभग 45 कंपनियां हैं।
देश में दोपहिया और तिपहिया वाहनों को पूरी तरह से इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) में बदलने के लिए 285 अरब डॉलर की जरूरत होगी। नीति आयोग के सहयोग से प्रकाशित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (डब्ल्यूईएफ) के श्वेतपत्र में कहा गया है कि अंतिम छोर और शहरी बेड़े भारत में इलेक्ट्रिक दोपहिया और तिपहिया वाहनों को अपनाने का नेतृत्व कर रहे हैं, लेकिन इसे ईवी में परविर्तित के लिए लागत, नई तकनीक में विश्वास की कमी, पुरानी गाड़ियों की बिक्री की कम कीमत और अनिश्चित विश्वसनीयता के कारण लोग ईवी में नहीं बदल रहे हैं।
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भारत में वाहनों की बिक्री में दोपहिया और तिपहिया वाहनों की हिस्सेदारी 80 फीसदी से अधिक है। पिछले कुछ वर्षों में इलेक्ट्रिक वाहनों को तेजी से अपनाया जा रहा है। इलेक्ट्रिक दोपहिया और तिपहिया वाहन बनाने वाली लगभग 45 कंपनियां हैं। इन्होंने 10 लाख ईवी की बिक्री की है।
ईवी खरीदना महंगा है, लेकिन उनकी चलाने की लागत बहुत कम है। डब्ल्यूईएफ ने कहा, अधिक निवेश आकर्षित करने के लिए एक लंबे रोडमैववाली नीति की जरूरत है। सरकारों द्वारा खरीद प्रोत्साहन ईवी को अपनाने के लिए प्रमुख चालक रहे हैं। हालांकि, प्रोत्साहनों को अंततः समाप्त करने की आवश्यकता होगी।