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राजनीतिक चंदा लेने का वैध तरीका है 'इलेक्टोरल बांड', जानिए इसके बारे में सबकुछ

Sun, 30 Sep 2018 12:12 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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electoral bond
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राजनीतिक दलों को प्राप्त होने वाले चंदों के लिए चुनावी बांड की बिक्री के पांचवें चरण की घोषणा हो चुकी है। इसके तहत 1-10 अक्टूबर के बीच कोई भी व्यक्ति बांड खरीद सकता है और पार्टी फंड में वैध तरीके से चंदा दे सकता है। 

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जानकारी के मुताबिक, भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) की 29 अधिकृत शाखाओं के जरिए चुनावी बांडों की बिक्री की जाएगी और उन बांडों को राजनीतिक दल अधिकृत बैंक के खातों के जरिए भुना सकते हैं। 

हालांकि यह बांड जारी होने के तिथि से 15 दिनों के लिए ही वैध होंगे। वैध अवधि खत्म होने के बाद अगर राजनीतिक दल चुनावी बांड जमा करते हैं तो उन्हें उसका भुगतान नहीं किया जाएगा। 
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क्या है चुनावी (इलेक्टोरल) बांड? 

राजनीतिक दलों को प्राप्त होने वाले चंदों यानी चुनावी फंडिंग को साफ-सुथरा और पारदर्शी बनाने के लिए सरकार ने पिछले साल ही चुनावी बांड (इलेक्टोरल बांड) की रूपरेखा जारी की थी। 

दरअसल, चुनावी बांड एक वचन पत्र (प्रॉमिसरी नोट) की तरह है, जिस पर बैंकों द्वारा किसी भी तरह का ब्याज नहीं दिया जाता है। राजनैतिक दल इन चुनावी बांड की बिक्री अधिकृत बैंक को करेंगे और वैधता अवधि के दौरान राजनैतिक दलों के बैंक खातों में बांड की खरीद के अनुपात में राशि जमा करा दी जाएगी, जिसे वो निकाल सकते हैं। 

चुनावी बांड जारी करने का उद्देश्य 

चुनावी बांड का उद्देश्य राजनीतिक दलों को दिए जाने वाले नकद व गुप्त चंदे के चलन को रोकना है। दरअसल, जब राजनीतिक दलों को चंदे की राशि नकदी में दी जाती है, तो धन के स्रोत के बारे में, चंदा दाने वाले व्यक्ति या संगठन के बारे में और यह धन कहां खर्च किया गया, इसकी भी कोई जानकारी नहीं मिलती। इसलिये सरकार ने चुनावी बांड की शुरुआत की थी ताकि चुनावी फंडिंग साफ-सुथरी और पारदर्शी हो। 

कौन खरीद सकता है चुनावी बांड 

भारत का कोई भी नागरिक, कंपनी या संस्था चुनावी चंदे के लिये बांड खरीद सकते हैं। इसे नकद में नहीं खरीदा जा सकता बल्कि चेक या ई-भुगतान के जरिये ही खरीदा जा सकता है। बांड खरीदते समय केवाईसी नियमों का पालन करना जरूरी है। पार्टी को फंड देने वालो की पहचान बैंक के पास गुप्त रहेगी। 

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कैसे मिलेंगे चुनावी बांड 

ये चुनावी बांड भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) की विशेष शाखाओं में मिलेंगे। ये बांड 1 हजार, 10 हजार, 1 लाख और 1 करोड़ रुपये के गुणक (मल्टीपल) में होते हैं। इन बांड की बिक्री साल के चार महीनों- जनवरी, अप्रैल, जुलाई और अक्टूबर में 10 दिनों के लिये होती है। इसी दौरान इन्हें खरीदा जा सकता है।    

किस राजनीतिक दल को दिए जाएंगे चुनावी बांड 

ये बांड किसी भी राजनीतिक दल को नहीं दिए जा सकते हैं, बल्कि ये सिर्फ उन्हीं राजनीतिक दलों को दिए जा सकते हैं जो जनप्रतिनिधित्व कानून के तहत रजिस्टर्ड हों और पिछले विधानसभा या लोकसभा चुनाव में कुल डाले गए वोट का कम से कम एक फीसदी उन्हें मिला हो। 

चुनावी बांड जारी करने वाला भारत दुनिया का पहला देश 

भारत दुनिया का पहला ऐसा देश है, जहां चुनावी फंडिंग और राजनीति में बढ़ते भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के लिए इस तरह का बांड जारी किया गया है। हालांकि कुछ देशों में राजनीतिक पार्टियों का पूरा खर्च सरकार उठाती है, ताकि राजनीतिक दलों में भ्रष्टाचार न हो। माना जाता है चुनावी बांड का प्रचलन राजनीति में काले धन के इस्तेमाल पर पूरी तरह से रोक लगा देगा।
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