बालाकोट में हुए हवाई हमले पर उनके द्वारा कथित रूप से सबूत मांगने को लेकर पूछे गये सवाल पर उन्होंने कहा मैंने कोई स्पष्टीकरण नहीं मांगा था। मैंने कहा था कि अंतरराष्ट्रीय मीडिया में यह प्रश्न चिन्ह लग रहा है। इसलिए केंद्र सरकार को इस मामले में उनके पास जो भी प्रमाण है सामने रखना चाहिए। दिग्विजय ने कहा कि आप यह क्यों भूल जाते हैं कि पुलवामा में 44 लोग शहीद हुए।
आईजी कश्मीर ने इस हमले के 6 दिन पहले 8 फरवरी को कश्मीर के सीआरपीएफ, पुलिस, सेना, सबको सूचना दी थी कि कोई भी घटना हो सकती है और यह सीआरपीएफ का 2500 लोगों का काफिला जा रहा है। रोड को सेंसिटाइज किया जाना चाहिए था, क्योंकि जैश-ए-मोहम्मद ने पहले ही चेतावनी दी थी। उसके बावजूद यह घटना कैसे हो गई।
उन्होंने कहा कि रांग साइड से आकर उसने आतंकवादी ने यह हमला कर दिया, जिसमें 44 लोग शहीद हुए। यह ग्रॉस इंटेलिजेंस फेलियर है। इस पर आज तक न मीडिया चर्चा करती है, न प्रधानमंत्री ने कोई बयान दिया, न राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने इस पर जवाब दिया। इन प्रश्नों के जवाब कौन देगा।