प्रयागराज का कुंभ मेला 15 जनवरी को मकर संक्रांति के दिन पहले शाही स्नान के साथ शुरू होकर चार मार्च को महाशिवरात्रि पर स्नान के साथ संपन्न होगा। इसी बीच भाजपा ने 21-23 जनवरी को अप्रवासी भारतीय सम्मलेन का आयोजन वाराणसी में किया है। इस सम्मेलन में आने वाले अप्रवासी मेहमानों को कार्यक्रम की समाप्ति के बाद प्रयागराज में कुंभ मेला दिखाने की योजना है।
कुंभ की भव्यता के सहारे मोदी सरकार भारतीयों के बीच अपनी हिंदूवादी छवि मजबूत करना चाहती है। ध्यान रहे कि यह अप्रवासी भारतीय समूह पीएम की विदेश यात्राओं के समय उनका सबसे बड़ा समर्थक बनकर उभरा है। इसके आलावा यही वर्ग भाजपा और राष्ट्रीय सेवक संघ को सबसे ज्यादा आर्थिक मदद भी करता रहा है। ऐसे में इस वर्ग के बीच भाजपा अपनी मजबूत हिंदूवादी छवि को चमकाने की हर संभव कोशिश करेगी।
चुनाव के पूर्व हिंदू जनता तक पहुंच
पीएम मोदी की छवि हिंदूवादी की रही है। माना जाता है कि भाजपा को मिले एतिहासिक जनमत के पीछे उनकी यही छवि सबसे ज्यादा कारगर साबित हुई। ऐसे में अगले चुनाव के पूर्व वे अपने उस वोट बैंक तक एक सकारात्मक संदेश अवश्य देना चाहेंगे और इसके लिए कुंभ से बेहतर अवसर और कोई दूसरा नहीं हो सकता था। कुंभ मेले की संगम की तस्वीरें तमाम व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए लोगों तक पहुंचाई जा रही हैं। इससे एक सकारात्मक माहौल तैयार हो रहा है जो अंततः भाजपा के पक्ष में जाएगा।
केंद्र सरकार व भाजपा पर अगले आम चुनाव के पहले राम मंदिर के निर्माण के लिए कानून बनाने का दबाव बढ़ता जा रहा है। दिल्ली में धर्म संसद, अहमदाबाद में संतों की अखिल भारतीय बैठक में राममंदिर निर्माण के लिए संसद में कानून बनाने की मांग की जा चुकी है। संघ प्रमुख मोहन भागवत ने विज्ञान भवन में आयोजित कार्यक्रम व भैया जी जोशी ने रामलीला मैदान में आयोजित विहिप की रैली में मंदिर को लेकर केंद्र सरकार पर दबाव बढ़ाया है।
विहिप के नेतृत्व में कुंभ नगरी में आयोजित धर्म संसद में राम मंदिर पर फैसला लेने की बात कही जा रही है। इस पूरे प्रकरण से यह साफ है कि सबकी निगाह धर्म संसद से पारित होने वाले प्रस्ताव पर होगी। चुनाव से ठीक पूर्व इस तरह के आयोजन से भाजपा के मंसूबों को ताकत मिलेगी।
21-22 फरवरी को पूर्वांचल में भाजपा के किसान मोर्चे का राष्ट्रीय अधिवेशन भी आयोजित किया जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं इस कार्यक्रम में किसानों के लिए कई बड़ी घोषणाएं करने वाले हैं। कुंभ के माहौल में इस कार्यक्रम के जरिए से भी किसानों तक सकारात्मक संदेश दिए जाने की योजना कारगर साबित हो सकती है।