चार सीटों पर हो रहे चुनाव में से तीन फिलहाल भाजपा और एक कांग्रेस के पास है। नियमानुसार, राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए उम्मीदवार को एकल हस्तांतरित वोट के तहत 36 वोट की जरूरत है। भाजपा अपने विधायकों के दम पर दो सीटें आसानी से हासिल कर लेगी लेकिन तीसरी सीट के लिए उसे अन्य पार्टी के विधायकों की जरूरत पड़ेगी।
कांग्रेस को बीटीपी, एनसीपी और निर्दलीय विधायकों की मदद से दो सीटें आसानी से जीतने का भरोसा था लेकिन लगातार इस्तीफों से उसकी राह मुश्किल होती जा रही है।
2017 जैसे हालात
राज्य में एक बार फिर 2017 जैसे हालात बनते दिख रहे हैं। उस समय भाजपा ने एक अतिरिक्त उम्मीदवार खड़ा कर कांग्रेस के दिग्गज नेता अहमद पटेल की सीट फंसा दी थी। कांग्रेस के 6 विधायकों ने चुनाव से ठीक पहले इस्तीफा दे दिया था। एक वोट रद्द होने की वजह से किसी तरह अहमद जीत पाए थे लेकिन इसके लिए कांग्रेस को चुनाव आयोग से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक लड़ाई लड़नी पड़ी थी।