साल 2014 में हुए हरियाणा विधानसभा चुनाव में भाजपा ने इतिहास बनाते हुए पहली बार अपने दम पर सरकार बनाई थी। राज्य की कुल 90 विधानसभा सीटों में भाजपा ने 47 सीटों पर जीत हासिल की थी। वहीं, कांग्रेस को 15, इंडियन नेशनल लोकदल को 19 सीटें मिली थीं। इसके अलावा अन्य व निर्दलीयों ने नौ सीटों पर जीत दर्ज की थी।
हरियाणा में पिछले विधानसभा चुनाव की बात करें तो भाजपा की सफलता का सबसे बड़ा कारण बिखरा विपक्ष था। कांग्रेस में चल रही गुटबाजी और इनेलो के बिखराव ने भाजपा की जीत तय करने में अहम भूमिका निभाई थी। राजनीति के विशेषज्ञ कहते हैं कि इससे जाट मतदाताओं का एक बड़ा हिस्सा भाजपा के पास आया।
288 विधानसभा सीटों वाले महाराष्ट्र में साल 2014 का चुनाव भाजपा और शिवसेना ने अलग-अलग लड़ा था। 124 सीटों पर जीत हासिल करने के साथ भाजपा राज्य में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी। चुनाव के बाद भाजपा-शिवसेना की सरकार बनी थी। इस बार दोनों पार्टियां मिलकर चुनाव लड़ेंगी। वहीं, इस बार विधानसभा चुनाव में कांग्रेस और एनसीपी मिलकर भाजपा-शिवसेना गठबंधन से मुकाबला करने के लिए तैयार हैं।
झारखंड में रहेगा पिछड़ा वर्ग आरक्षण का मुद्दा
साल 2014 में झारखंड विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 81 में से 37 सीटों पर जीत हासिल की थी। भाजपा और अजसू ने मिलकर राज्य में सरकार बनाई थी। बाद में झारखंड मुक्ति मोर्चा के छह विधायक भाजपा में आ गए थे। वर्तमान में राज्य में भाजपा के 43 विधायक हैं वहीं, झारखंड मुक्ति मोर्चा के 19 और कांग्रेस के छह विधायक हैं। भाजपा ने इस बार झारखंड में 65 सीटें जीतने का लक्ष्य रखा है।
आगामी विधानसभा चुनाव में पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) आरक्षण का मुद्दा खासा असर डालेगा। बता दें कि राज्य में ओबीसी का 14 फीसदी आरक्षण है और झारखंड मुक्ति मोर्चा ने इसे बढ़ाकर 27 फीसदी करने का वादा किया है। ऐसे में पिछड़े वर्ग को लुभाने के लिए भाजपा क्या कदम उठाएगी यह देखने वाला होगा।