उप चुनाव आयुक्त ने बताया कि अधिकांश यूनिटों में या तो केबल की समस्या थी, या बटन नहीं दब रहे थे। उन्होंने बताया कि सेक्टर ऑफिसर के पास दो अतिरिक्त मशीनें रिजर्व में होती हैं, और शिकायत मिलते ही वे तुरंत बदल देते हैं। ज्यादा वीवीपैट खराब होने के पीछे जैन ने वजह बताई।
उन्होंने कहा कि जब भी बैलट यूनिट या सेंट्रल यूनिट में खराबी आती है, तो वीवीपैट को भी बदलना पड़ता है, जिसकी वजह से वीपीपैट बदलने के ज्यादातर मामले सामने आते हैं। उन्होंने बताया कि पिछले चुनावों की सीख और अधिकारियों को मशीनों की बेहतर ट्रेनिंग देने से कम दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
जैन ने बताया कि मिजोरम में 32 हजार 575 बूथ थे, जहां पर मात्र .51 प्रतिशत बैलेट यूनिट, .51 प्रतिशत सेंट्रल यूनिट और 2.63 प्रतिशत वीवीपैट में दिक्कतें आईं। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ में प्रथम चरण में 4336 वीवीपैट मशीनों में से केवल 84 वीवीपैट (1.9 प्र.श.) और 47 सेंट्र्ल यूनिट में दिक्कतें आईं।
वहीं, दूसरे चरण में 19 हजार 336 ईवीएम मशीनों के अलावा 25 प्रतिशत ईवीएम रिजर्व में रखी गई थीं। जिसमें 114 बैलेट यूनिट (.44 प्रतिशत), 89 सेंट्रल यूनिट (.46 प्रतिशत) और 359 वीवीपैट यूनिट (1.66 प्रतिशत) में खराबी पाई गई थी।