केंद्रीय चुनाव आयोग ने बृहस्पतिवार को सुप्रीम कोर्ट से कहा कि उसे कानून बनाने का अधिकार मिलना चाहिए जोकि अभी केंद्र सरकार के पास है। साथ ही आयोग ने कहा कि उसे और अधिक स्वायत्तता की दरकार है।
कोर्ट में दाखिल किए गए अपने हलफनामे में आयोग ने कहा कि वह वर्ष 1998 से लगातार और स्वायत्तता देने के लिए सरकार को प्रस्ताव भेज जा रहा है। मुख्य चुनाव आयुक्त को जिस तरह से संरक्षण मिला हुआ है, उसी तरह का संरक्षण चुनाव आयुक्तों को भी मिलना चाहिए। जुलाई, 2004 में भी सरकार को इस संदर्भ में प्रस्ताव भेजा था।
विधि आयोग की 255वीं रिपोर्ट में भी चुनाव आयुक्तों को संरक्षण देने की सिफारिश की गई थी। आयोग ने यह जवाब भाजपा नेता अश्विनी कुमार उपाध्याय की उस जनहित याचिका पर दिया है जिसमें अपील की गई है कि मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की जो प्रक्रिया है, वही प्रक्रिया चुनाव आयुक्तों को हटाने के लिए भी होनी चाहिए।