चुनाव आयोग को लेकर चल रहे विवाद के बीच भाजपा और विपक्षी दलों के नेताओं के बीच बयानबाजी तेज हो गई है। भाजपा नेताओं ने चुनाव आयोग की ओर से जारी स्पष्टीकरण का हवाला देते हुए विपक्ष के आरोपों पर सवाल उठाए हैं। वहीं, कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर सवाल खड़े किए हैं।
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि लोकतंत्र में सवाल पूछे जाने चाहिए, लेकिन किसी आंतरिक नोट को अंतिम फैसला या किसी आपत्ति को संस्थागत संकट के तौर पर पेश करने से पहले पूरा रिकॉर्ड सामने रखा जाना चाहिए।
कॉमेडियन की तरह व्यवहार कर रहे हैं कांग्रेस नेता : सीएम पुष्कर सिंह धामी
सीएम धामी ने कहा कि आंतरिक विचार-विमर्श लोकतांत्रिक निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा है। धामी ने कहा कि सामने आए तथ्यों और रिकॉर्ड के आधार पर ध्यान इस बात पर होना चाहिए कि चुनाव आयोग का अंतिम फैसला क्या था, आखिर में क्या घोषित किया गया और क्या वह कानून की कसौटी पर खरा उतरता है।
धामी ने कहा, "सवाल उठाना लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन उन सवालों के जवाब संबंधित दस्तावेजों और संवैधानिक प्रक्रियाओं से मिलने चाहिए। यह केवल किसी एजेंडे को आगे बढ़ाने या संस्थाओं को बदनाम करने के बारे में नहीं होना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट, प्रशासनिक व्यवस्था या ईवीएम पर उंगली उठाने की कोशिशें स्वस्थ लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुरूप नहीं हैं।" उन्होंने कांग्रेस को लेकर कहा कि उसका संगठन पूरी तरह बिखर चुका है और उसके नेता फिलहाल "कॉमेडियन की तरह व्यवहार कर रहे हैं।"
नायब सिंह सैनी ने साधा राहुल गांधी पर निशाना
हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि विपक्षी दल इन आरोपों के आधार पर ऐसा माहौल बनाने की कोशिश कर रहे हैं, जिससे लगे कि देश की चुनावी व्यवस्था में गंभीर अनियमितताएं हो रही हैं। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग ने अब सर्वसम्मत संयुक्त बयान के जरिए स्थिति पूरी तरह स्पष्ट कर दी है। सैनी ने कांग्रेस और पूरे विपक्ष पर मनगढ़ंत कहानियां गढ़ने और बिना सोचे कुछ भी कहने का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा, "राहुल गांधी और कांग्रेस के सदस्यों ने इसकी आदत बना ली है कि जो मन में आए कहो और बाद में माफी मांग लो। गरिमा का सवाल अब नहीं रह गया है। कांग्रेस ने विपक्ष के कद को कम कर दिया है और जिम्मेदार आचरण पूरी तरह छोड़ दिया है।" सैनी ने कहा कि चुनाव आयोग के स्पष्ट जवाब के बाद कांग्रेस और "इंडिया गठबंधन" के झूठ देश के सामने पूरी तरह उजागर हो गए हैं।
योगी सरकार के मंत्री बोले- विपक्ष के आरोपों का हो गया अंत
उत्तर प्रदेश के मंत्री मनोज कुमार पांडेय ने भी चुनाव आयोग के स्पष्टीकरण का समर्थन किया। उन्होंने कहा, "तीनों चुनाव आयुक्त सामने आकर स्थिति स्पष्ट कर चुके हैं और इससे विपक्ष के आरोपों का अंत हो गया है।" भाजपा नेता केया घोष ने राहुल गांधी और विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि चुनाव में हार के बाद वे चुनाव आयोग, भाजपा, आरएसएस और अन्य संस्थाओं पर लगातार आरोप लगा रहे थे।
उन्होंने कहा, "जिस तरह से राहुल गांधी और पूरे विपक्ष ने चुनाव आयोग पर हमला किया, वह बेहद आपत्तिजनक था। वे चुनाव हारते हैं क्योंकि जनता उन्हें वोट नहीं देती। इसके बावजूद वे चुनाव आयोग, भाजपा, आरएसएस और हर दूसरी चीज को लगातार गाली देते रहे।"
सांविधानिक संस्थाओं को बिना सबूत बदनाम करने की कोशिश : अनुराग ठाकुर
केया घोष ने कहा कि अब चुनाव आयोग की पूरी पीठ ने एकजुट होकर बताया है कि एसआईआर की प्रक्रिया पर फैसला सर्वसम्मति से लिया गया था। उनके अनुसार, इसके बाद विपक्ष के पास कहने के लिए कुछ नहीं बचा है। उन्होंने राहुल गांधी पर लोगों को गुमराह करने और झूठ बोलने का आरोप लगाते हुए कहा कि चुनाव आयोग और देश के लोकतंत्र पर हमला करना उनकी आदत बन गई है।
भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर ने कहा कि चुनाव आयोग ने विस्तृत प्रेस नोट जारी कर पूरी स्थिति स्पष्ट कर दी है। उन्होंने राहुल गांधी और कुछ विपक्षी नेताओं पर बिना आधार के आरोप लगाकर जनता को गुमराह करने और चुनावी हार छिपाने की कोशिश करने का आरोप लगाया। अनुराग ठाकुर ने कहा कि विपक्ष सांविधानिक संस्थाओं को बिना सबूत बदनाम करने की कोशिश कर रहा है।
विपक्ष ने उठाए चुनाव आयोग पर सवाल
कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने केरल के पूर्व मुख्य सचिव जिजी थॉमसन की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर लगाए गए आरोपों को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि अगर यह आरोप सही हैं तो यह पूरी तरह गैरकानूनी और अनैतिक है।
प्रियंका गांधी ने कहा, "यह पूरी तरह गैरकानूनी और अनैतिक है। इससे पता चलता है कि जो लोग हमारी चुनाव व्यवस्था और चुनाव कराने वाली संस्थाओं के सर्वोच्च स्तर पर हैं, उनके राजनीतिक झुकाव हैं। सिर्फ राजनीतिक झुकाव ही नहीं, बल्कि वे सक्रिय रूप से उन पार्टियों का प्रचार भी कर रहे हैं। वे निष्पक्ष चुनाव कैसे करा सकते हैं?"
उन्होंने कहा कि यह उन कई घटनाओं में से एक है, जिन्हें वह पूरी तरह गैरकानूनी और असांविधानिक मानती हैं। प्रियंका गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग की। उन्होंने कहा, "पूरे देश में प्रदर्शन हो रहे हैं। हर जिले में हमने उनके खिलाफ प्रदर्शन किया है। दिल्ली में भी प्रदर्शन हुए हैं।"
प्रमोद तिवारी बोले- जारी हों पत्र, सामने आए सच्चाई
कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने चुनाव आयोग के दो आयुक्तों की ओर से लिखे गए पत्रों को सार्वजनिक करने की मांग की। उन्होंने कहा कि पिछले 10 महीने में लिखे गए इन पत्रों में क्या था और कौन सी चिंताएं उठाई गई थीं, यह सामने आना चाहिए। उन्होंने कहा, "भाजपा को यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि क्या मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार उनके एजेंट हैं।"
एसआईआर को खारिज किया जाए: कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी
कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने कहा कि देश के लोगों की नजर में चुनाव आयोग की विश्वसनीयता पूरी तरह खत्म हो गई है। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के तत्काल इस्तीफे की मांग की। उन्होंने कहा, "सभी एसआईआर को खारिज करके जून 2024 में मौजूद मतदाता सूची को देश में बहाल किया जाना चाहिए। क्योंकि मतदाता सूची के साथ छेड़छाड़ करने से 13 करोड़ लोग अपने मतदान के अधिकार से वंचित हो जाते हैं। लोकतंत्र के साथ इससे बड़ी और घृणित गड़बड़ी नहीं हो सकती।"
मनीष तिवारी ने कहा कि इस पूरे मामले ने भारत के लोकतंत्र पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है और चुनाव आयोग की बची हुई विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए ग्यानेेश कुमार का इस्तीफा जरूरी है।
सपा सांसद अवधेश प्रसाद ने लगाए क्या आरोप?
समाजवादी पार्टी के सांसद अवधेश प्रसाद ने कहा कि चुनाव आयोग ने जनता का भरोसा खो दिया है और अब वह सरकार के साथ मिलकर काम कर रहा है। उन्होंने कहा, "अब उनके पास जनता का भरोसा नहीं है और वे चुनाव आयोग पर निर्भर हैं। हम बार-बार कह चुके हैं कि चुनाव आयोग न तो निष्पक्ष है और न स्वतंत्र। वह सरकार के साथ मिलकर काम कर रहा है।"
टीएमसी ने चुनाव आयोग के बयान को लेकर क्या कहा?
तृणमूल कांग्रेस सांसद सौगत रॉय ने कहा कि चुनाव आयुक्तों के संयुक्त बयान से विवाद खत्म नहीं होता। उन्होंने कहा कि दो चुनाव आयुक्तों ने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ बयान दिए हैं और 10 महीने के दौरान 14 आपत्तियां उठाई गई थीं। उन्होंने दावा किया कि फॉर्म 6 में बदलाव भी दोनों चुनाव आयुक्तों को जानकारी दिए बिना किए गए। सौगत रॉय ने कहा कि अब आया संयुक्त बयान पूरे मामले के सामने आने के बाद नुकसान की भरपाई की कोशिश जैसा है।
आरजेडी ने उठाए कौन से सवाल?
आरजेडी सांसद मनोज झा ने कहा कि चुनाव आयोग केवल सुधारों की बात कर रहा है, लेकिन पहले जो हुआ उसका क्या होगा। उन्होंने कहा, "चुनाव आयोग केवल सुधारों की बात कर रहा है, लेकिन जो हो चुका है उसका क्या? चुनाव आयोग की कथित अवैधताओं के कारण जो सरकारें बनीं, उनके बारे में आयोग की ओर से कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया गया है।"