चुनाव आयोग विपक्षी दलों की इस मांग को खारिज कर सकता है, जिसमें उन्होंने वीवीपैट मशीनों का डिस्प्ले टाइम 7 सेकेंड से ज्यादा करने को कहा था। आयोग का कहना है कि अगर इसे लागू किया जाता है कि तो बूथों के बाहर मतदाताओं की लंबी लाइनें लग जाएंगी। वहीं आयोग ने ईवीएम मशीनों के जरिए बूथ कैप्चरिंग की आशंकाओं को सिरे से खारिज किया है। आयोग का कहना है कि मौजूदा परिपेक्ष्य में ईवीएम मशीनों के साथ यह असंभव है।
12 से 15 सेकेंड करने की मांग
पिछली 27 अगस्त को चुनाव सुधारों पर आयोजित चुनाव आयोग की सर्वदलीय बैठक में कई विपक्षी राजनीतिक दलों ने मांग की थी कि वीवीपैट (वेरिफायड पेपर ऑडिट ट्रायल) मशीनों का डिस्प्ले टाइम बढ़ाया जाए।
आयोग के सूत्र बताते हैं कि अगर डिस्प्ले का टाइम बढ़ा कर 7 सेंकेड से 15 सेकेंड किया जाता है, तो बूथों के बाहर मतदाताओं की लंबी लाइनें लग जाएंगी, जिससे मतदान प्रक्रिया में देरी होगी। हालांकि आयोग डिस्प्ले के पास एक स्लिप लगाने की योजना बना रहा है, जिस पर ‘वोट डालने के बाद डिस्प्ले पर देखें’ जैसा संदेश लिखा हो। इससे पहले सर्वदलीय बैठक में कांग्रेस नेता मुकुल वासनिक ने बैठक में वीवीपैट मशीनों का डिस्प्ले टाइम 7 सेकेंड से बढ़ा कर 15 सेकेंड करने की मांग की थी। उनका कहना था कि कई वोटर इस तकनीक से परिचित नहीं हैं। वहीं आम आदमी पार्टी के नेता राघव चड्ढा ने भी इसे 12 से 15 सेकेंड करने को कहा था। उनका तर्क था कि वोटरों के लिए इतना कम समय अपर्याप्त है।
पहले होता था 5 सेंकेड का वक्त
वहीं चुनाव आयोग के आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि वीवीपैट को लेकर तकनीकी विशेषज्ञ समिति की सिफारिश पर जुलाई, 2011 में आम मतदाताओं, राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय राजनीतिक दलों, सिविल सोसाइटी संगठनों और मीडिया की मौजूदगी में तिरूअनंतपुरम, दिल्ली, जैसलमेर, चेरापूंजी और लेह इनका फील्ड ट्रायल किया गया। उस वक्त इनका डिस्प्ले टाइम मात्र 5 सेकेंड होता था।
2013 में नगालैंड में वीवीपैट का प्रयोग
आयोग के सूत्र बताते हैं कि पहले फील्ड ट्रायल के बाद समिति की सिफारिश के आधार पर इनमें कुछ परिवर्तन किए गए। जिसके बाद अगस्त, 2012 में उन्हीं जगहों पर इनका दोबारा फील्ड ट्रायल शुरू हुआ, लेकिन इस बार इनका डिस्प्ले पीरियड बढ़ा कर 10 सेकेंड कर दिया गया। लेकिन तकनीकी समिति की सिफारिश पर इनका टाइम घटा कर 7 सेंकेंड कर दिया गया। वहीं तकनीकी विशेषज्ञ समिति ने 19 फरवरी, 2013 को अपनी बैठक में वीवीपीएटी के आखिरी डिजाइन पर अपनी मुहर लगा दी। वहीं सितंबर 2013 में नगालैंड राज्य के विधानसभा चुनावों में देश में पहली बार वीवीपैट मशीनों का इस्तेमाल किया गया। और वहां इनका रिजल्ट संतोषजनक रहा।
वीवीपैट पर लगेंगे हुड
साथ ही आयोग पेपर ट्रायल मशीन में लगे सेंसर के ऊपर हुड लगाने की योजना बना रहा है, ताकि सेंसर के ऊपर सीधे लाइट न पड़े। इसके अलावा पुरानी वीवीपैट मशीनों में भी ऐसे हुड लगाए जाएंगे। गौरतलब है कि उपचुनावों के दौरान कई बूथों पर वीवीपैट के काम न करने की शिकायतें आई थीं। जांच में पाया गया कि यह तकनीकी खराबी उन मतदान केंद्रों पर पाई गई, जिनमें मशीनें अत्यधिक धूप में रखी गई थीं।