चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि आपराधिक मामलों में दोषियों के चुनाव लडने पर आजीवन पाबंदी होनी चाहिए। साथ ही आयोग का यह भी मानना है कि आपराधिक मामलों में आरोपी नेताओं का ट्रायल एक वर्ष के भीतर पूरा हो जाना चाहिए। वर्तमान प्रावधान के मुताबिक, दोषी पर सजा काटने के छह वर्ष तक ही चुनाव लड़ने पर पाबंदी है।
चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर कर कहा है कि वह निष्पक्ष चुनाव के लिए प्रतिबद्ध है। आयोग ने कहा कि वह इसका समर्थन करती है कि आपराधिक मामलों में दो या उससे अधिक वर्ष की सजा पाने वालों पर चुनाव लड़ने की आजीवन पाबंदी होनी चाहिए। उसका कहना है कि स्वस्थ लोकतंत्र के लिए इस तरह की पाबंदी होनी चाहिए। भाजपा नेता अश्विनी उपाध्याय द्वारा दाखिल जनहित याचिका पर आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष अपना यह पक्ष रखा है।
हलफनामे में आयोग ने कहा कि चुनाव सुधार को लेकर उन्होंने विस्तृत प्रस्ताव सरकार को सौंप दिया है। इनमें अपराधमुक्त राजनीति, रिश्वत को संज्ञेय अपराध बनाना, पेड न्यूज पर पाबंदी और मतदान के 48 घंटे पहले तक विज्ञापनों पर प्रतिबंध आदि हैं। आयोग ने कहा कि अधिकतर सिफारिशों को विधि आयोग ने अपनी 244 और 255वीं रिपोर्ट को अप्रूव कर दिया है। फिलहाल यह केंद्र सरकार के विचाराधीन है।