2022 में विधायकों के पार्टी छोड़ देने और एकनाथ शिंदे के सीएम बनने के बाद शिवसेना दो गुटों में बंट गई थी। इसके बाद शिवसेना उद्धव गुट ने चुनाव आयोग से अपील की थी कि उनके दल को ऐसा प्रमाण पत्र जारी किया जाए कि वह जनता से स्वैच्छिक तौर पर योगदान ले सकते हैं।
महाराष्ट्र में इसी साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले उद्धव ठाकरे गुट की शिवसेना (यूबीटी) सार्वजनिक रूप से चंदा ले सकेगी। चुनाव आयोग ने गुरुवार को पार्टी को स्वैच्छिक रूप से लोगों से योगदान लेने की अनुमति दे दी।
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2022 में विधायकों के पार्टी छोड़ देने और एकनाथ शिंदे के सीएम बनने के बाद शिवसेना दो गुटों में बंट गई थी। इसके बाद शिवसेना उद्धव गुट ने चुनाव आयोग से अपील की थी कि उनके दल को ऐसा प्रमाण पत्र जारी किया जाए कि वह जनता से स्वैच्छिक तौर पर योगदान ले सकते हैं। इसके लेकर पार्टी के महासचिव सुभाष देसाई के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने गुरुवार को नई दिल्ली में चुनाव आयोग के अधिकारियों से मुलाकात की थी।
इसके बाद चुनाव आयोग ने पार्टी को एक सरकारी कंपनी को छोड़कर किसी भी व्यक्ति या संस्था से स्वैच्छिक तौर पर चंदा लेने की अनुमति दे दी। आयोग ने यह अनुमति लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 29 बी और 29 सी के तहत दी। इसके जरिये सभी राजनीतिक दलों में आए चंदे को नियंत्रित किया जाता है।
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आयोग ने इसमें आयकर अधिनियम की धारा 13ए के तहत विशेष छूट दी है, जिसमें राजनीतिक दल की ऐसी आय जो हाउस प्रॉपर्टी, अन्य स्रोतों और पूंजीगत लाभ या किसी व्यक्ति या कंपनी के स्वैच्छिक योगदान के रूप में आती है, तो उसे राजनीतिक दल की पिछले साल की कुल आय में शामिल नहीं किया जाएगा। आयोग ने पिछले दिनों विस चुनाव से पहले एनसीपी (शरद पवार) को जनता से दान लेने की अनुमति दी थी।
बता दें कि लोकसभा चुनाव 2024 में महाविकास अघाड़ी गठबंधन को काफी बढ़त मिली। इसमें शिवसेना यूबीटी ने सात, कांग्रेस ने 13 और एनसीपी ने एक सीट जीती थी। जबकि भाजपा 23 के मुकाबले नौ सीटों पर सिमट गई। भाजपा का वोट प्रतिशत 26.18 फीसदी रहा था।