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Election Analysis: असम और पश्चिम बंगाल में SC-ST आरक्षित सीटों पर BJP-NDA का दबदबा, जानें पूरा चुनावी समीकरण

Wed, 06 May 2026 08:23 PM IST
शिवम गर्ग पीटीआई, नई दिल्ली

सार

क्या भारत की राजनीति एक नए सामाजिक-राजनीतिक बदलाव की ओर बढ़ रही है? हालिया चुनाव नतीजों में असम से लेकर पश्चिम बंगाल तक एससी और एसटी आरक्षित सीटों पर भाजपा और एनडीए की बढ़ती पकड़ यह सवाल खड़ा करती है कि क्या पारंपरिक राजनीतिक समीकरण बदल रहे हैं और एक नया सत्ता संतुलन आकार ले रहा है?
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पश्चिम बंगाल-असम में आरक्षित सीटों पर BJP-NDA का दबदबा - फोटो : Amar Ujala Graphics
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विस्तार
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हाल ही में संपन्न हुए असम और पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के नतीजों ने देश की राजनीति में महत्वपूर्ण बदलाव के संकेत दिए हैं। इन चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और उसके सहयोगी दलों ने अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) के लिए आरक्षित सीटों पर ऐतिहासिक सफलता हासिल की है। वहीं, तमिलनाडु और पुदुचेरी में भी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) से जुड़े दलों ने अपना प्रभाव बनाए रखा है।

असम में एनडीए की मजबूत पकड़

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असम में भाजपा और उसके सहयोगी दलों ने आरक्षित सीटों पर शानदार प्रदर्शन किया। राज्य की 9 एससी आरक्षित सीटों में से भाजपा ने 5 सीटें अपने नाम कीं, जबकि एनडीए के सहयोगी असम गण परिषद (AGP) ने 3 सीटों पर जीत दर्ज की। कांग्रेस को केवल 1 सीट से संतोष करना पड़ा।

एसटी आरक्षित सीटों पर एनडीए का दबदबा और भी स्पष्ट दिखाई दिया। कुल 18 एसटी सीटों में से सभी पर एनडीए का प्रभाव रहा। भाजपा ने इनमें से 13 सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि उसके सहयोगी बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट (BPF) ने 5 सीटें जीतीं। इसके अलावा एक सामान्य सीट पर भी एनडीए समर्थित आदिवासी उम्मीदवार ने जीत हासिल की। इन नतीजों से साफ संकेत मिलता है कि एससी और एसटी मतदाताओं के बीच भाजपा और एनडीए के प्रति समर्थन बढ़ा है। आरक्षित सीटें अब एनडीए के लिए एक मजबूत चुनावी आधार के रूप में उभरकर सामने आई हैं।
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परिसीमन और आदिवासी वोट बैंक की भूमिका
इस चुनावी सफलता में परिसीमन (डिलिमिटेशन) की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही। नए परिसीमन के बाद आदिवासी आरक्षित सीटों की संख्या 16 से बढ़कर 19 हो गई, जबकि एससी सीटें 8 से बढ़कर 9 हो गईं। इससे चुनावी समीकरणों में बड़ा बदलाव देखने को मिला। बीपीएफ जैसे सहयोगी दलों के जरिए आदिवासी मतदाताओं का मजबूत संगठन और भाजपा की रणनीतिक पहुंच ने एनडीए को विशेष रूप से ऊपरी असम और पहाड़ी क्षेत्रों में मजबूत स्थिति दिलाई। इसका परिणाम यह रहा कि एसटी आरक्षित सीटों पर एनडीए लगभग एकतरफा जीत दर्ज करने में सफल रहा।

पश्चिम बंगाल में बड़ा राजनीतिक बदलाव
पश्चिम बंगाल के चुनावी परिणामों ने राज्य की राजनीति में बड़े बदलाव का संकेत दिया है। कुल 68 एससी आरक्षित सीटों में से भाजपा ने 51 सीटों पर जीत हासिल की, जो लगभग 75 प्रतिशत हिस्सेदारी के बराबर है। वहीं तृणमूल कांग्रेस (TMC) को केवल 17 सीटों पर जीत मिली। एसटी आरक्षित सीटों पर भाजपा का प्रदर्शन और भी प्रभावशाली रहा। उत्तरी बंगाल और जंगलमहल जैसे आदिवासी क्षेत्रों में पार्टी ने सभी 16 सीटों पर जीत दर्ज की, जिससे उसका दबदबा स्पष्ट हो गया।

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कुल मिलाकर, 84 एससी और एसटी आरक्षित सीटों में से भाजपा ने 67 सीटों पर कब्जा जमाया, जबकि टीएमसी केवल 17 सीटों तक सीमित रह गई। यह परिणाम इस बात का संकेत है कि इन सामाजिक समूहों के बीच भाजपा की पकड़ मजबूत हुई है और वह पहले की तुलना में अधिक प्रभावशाली राजनीतिक शक्ति बनकर उभरी है। विशेष रूप से मतुआ समुदाय और सीमावर्ती क्षेत्रों में एससी बहुल इलाकों ने भाजपा के पक्ष में निर्णायक भूमिका निभाई, जिससे पार्टी की स्थिति और मजबूत हुई।
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तमिलनाडु और पुदुचेरी में एनडीए की स्थिति
तमिलनाडु में एनडीए सहयोगी अन्नाद्रमुक (AIADMK) ने भी आरक्षित सीटों पर अच्छा प्रदर्शन किया। 46 एससी आरक्षित सीटों में से 9 सीटें पार्टी ने जीतीं, जबकि 2 एसटी सीटों में से 1 सीट उसके खाते में गई। पुदुचेरी में भी एनडीए का प्रभाव देखने को मिला। यहां एआईएनआरसी (AINRC) ने 5 एससी आरक्षित सीटों में से 2 पर जीत दर्ज की।

समग्र चुनावी तस्वीर
इन चुनाव परिणामों ने कई राज्यों में राजनीतिक समीकरणों को नया रूप दिया है। पश्चिम बंगाल में भाजपा ने 207 सीटों के साथ स्पष्ट बहुमत से भी आगे बढ़कर टीएमसी के लंबे शासन को चुनौती दी है। असम में एनडीए लगातार तीसरी बार दो-तिहाई बहुमत के साथ सरकार बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, जहां उसने 126 सीटों में से 102 सीटें हासिल की हैं। वहीं, तमिलनाडु में अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी टीवीके ने अपने पहले ही चुनाव में मजबूत उपस्थिति दर्ज कर सभी को चौंका दिया, जिससे डीएमके को कड़ी चुनौती मिली। पुदुचेरी में भी एनडीए ने 30 सदस्यीय विधानसभा में बहुमत हासिल करते हुए 18 सीटों के साथ मजबूत स्थिति बनाई है।

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