कांग्रेस मुख्यालय के सूत्र बताते हैं कि म.प्र. विधानसभा चुनाव में प्रियंका गांधी प्रचार की अहम जिम्मेदारी निभाएंगी। वह 22 बड़ी जनसभाएं कर सकती हैं। कर्नाटक विधानसभा चुनाव प्रचार में कांग्रेस ने अपने महासचिव को अपनाया था और पार्टी को उम्मीद है कि म.प्र. में भी वह गेम चेंजर साबित होंगी। बताते हैं म.प्र. के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने भी प्रियंका गांधी के प्रचार पर खासा जोर दिया है। म.प्र. विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष गोविंद सिंह भी लगातार सिंधिया के लिए चुनौती बन रहे हैं। सिंधिया के सामने एक बड़ी चुनौती और है। समझा जा रहा है कि यह चुनौती अपने समर्थकों को टिकट दिलाने की है। इसके लिए सिंधिया को काफी पापड़ बेलने पड़ सकते हैं। कांग्रेस के नेता इसका जिक्र करके काफी इतराते हैं।
समझ लीजिए प्रियंका की टीआरपी: बस एक ट्वीट और 41 एफआईआर
पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के सचिवालय के सूत्र का कहना है कि प्रियंका गांधी ने केवल एक ट्वीट भर किया और उसकी ताकत समझ लीजिए। प्रियंका गांधी ने म.प्र. की शिवराज सिंह चौहान की सरकार को 50 प्रतिशत कमीशन की सरकार क्या बताया, प्रदेश में 41 स्थानों पर उनके और कमल नाथ के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज हो चुकी है। यह प्रथमिकी म.प्र. के कांग्रेस नेता अरुण यादव के खिलाफ भी दर्ज हुई है। अरुण यादव कहते हैं कि दरअसल शिवराज सरकार के कामकाज, भ्रष्टाचार से जनता ऊब चुकी है। यह भाजपा और उसके नेताओं की बौखलाहट को दर्शा रहा है। अरुण यादव कहते हैं कि इस बार के चुनाव में जनता के फैसले की आशंका अभी से सत्ता पक्ष को डराने लगी है। प्रियंका गांधी पर एफआईआर को लेकर उनके पति रॉबर्ट वाड्रा ने भी प्रतिक्रिया दी है। रॉबर्ट वाड्रा के अनुसार प्रियंका गांधी कर्नाटक विधानसभा चुनाव में गेम चेंजर साबित हुई थीं। म.प्र. में भी वह कांग्रेस के पक्ष में बड़ा प्रचार करने जा रही हैं। भाजपा नेताओं के चेहरे पर इसकी घबराहट अभी से दिखाई देने लगी है।
पूरे म.प्र. में भाजपा को कड़ी टक्कर देगी कांग्रेस
2020 में अपनी सरकार गिरने के बाद से म.प्र. के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने काफी कड़ी मेहनत की है। म.प्र. के पूर्व मुख्यमंत्री और जनसंघ के संस्थापक सदस्यों में एक कैलाश जोशी के पुत्र दीपक जोशी भी अब कांग्रेसी हो चुके हैं। दतिया के पूर्व विधायक राधे लाल बघेल भी जोशी के साथ पहले ही कांग्रेसी हो चुके हैं। भोपाल के कांग्रेस के नेता दावा कर रहे हैं कि चुनाव की तारीख नजदीक आने दीजिए। भाजपा में भगदड़ मचनी तय है। तमाम भाजपा के नेता कांग्रेस के नेताओं के संपर्क में हैं। बताते हैं सिंधिया गुट के कई कई नेता कांग्रेस के नेताओं से पार्टी में वापसी के लिए संपर्क कर रहे हैं।
वरिष्ठ पत्रकार केपी सिंह कहते हैं कि इस बार कांग्रेस पूरे म.प्र. में भाजपा को कड़ी टक्कर देने जा रही है। यह चुनाव 2018 से अधिक दिलचस्प होगा। मालवा, ग्वालियर चंबल संभाग समेत सभी क्षेत्रों में भाजपा को सरकार विरोधी लहर का सामना करना पड़ रहा है।